भूमि अधिग्रहण के विरोध में जिला मुख्यालय पर गरजे किसान

भूमि अधिग्रहण के विरोध में जिला मुख्यालय पर गरजे किसान
सहारनपुर में जिलाधिकारी को ज्ञापन देने जाते किसान।

ज्ञापन सौंपकर की यूपीएसआईडीए द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग

सहारनपुर। जनपद के विभिन्न ग्रामों के किसानों एवं ग्रामीणों ने यूपी स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीएसआईडीए) द्वारा प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए शुरू की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का विरोध करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अधिग्रहण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा उनकी सहमति के बिना किसी भी प्रकार की अग्रिम प्रक्रिया न करने की मांग की।

आज ग्राम कुराली, उमाही, बड़ूली, नौजली और रूपड़ी के अनेक किसान एकत्र होकर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि उन्हें 11 जुलाई 2026 को प्रकाशित समाचार पत्र के माध्यम से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की जानकारी मिली है। उनका आरोप है कि अधिग्रहण के बदले दिया जा रहा प्रस्तावित मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम है, जिससे किसानों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। ज्ञापन में किसानों ने कहा कि अधिकांश परिवारों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। यदि उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसे में किसानों की इच्छा के विरुद्ध भूमि अधिग्रहण करना न केवल अन्यायपूर्ण होगा, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन होगा।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी प्रशासन को प्रार्थना पत्र एवं ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया गया है। इससे किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की कि यूपीएसआईडीए द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही किसानों एवं ग्रामीणों के साथ खुली बैठक आयोजित कर उनकी आपत्तियों, सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए तथा किसी भी निर्णय से पहले उनकी सहमति सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन देने वालों में शुभम चैधरी, रणधीर सिंह, योगेश कुमार, प्रवेश कुमार, सतीश कुमार, रोबिन त्यागी, नितिन, सतीश कुमार, इरशाद अहमद, दर्शन लाल, बलजिंदर सिंह आदि किसान मौजूद रहे।