चार मेडिकल कॉलेजों में 91% आरक्षण पर रोक, काउंसलिंग फिर शुरू; चंद्रशेखर आजाद ने उठाई बड़ी मांग

चार मेडिकल कॉलेजों में 91% आरक्षण पर रोक, काउंसलिंग फिर शुरू; चंद्रशेखर आजाद ने उठाई बड़ी मांग
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में NEET UG 2026 के तहत MBBS और BDS में दाखिले की काउंसलिंग प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदल गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू करीब 91 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके बाद पहले चरण में जारी सीट आवंटन को रद्द कर काउंसलिंग नए सिरे से कराने का फैसला लिया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में MBBS और BDS दाखिले के लिए पहले जारी सीट आवंटन को निरस्त कर दिया गया है। अब पात्र अभ्यर्थियों को दोबारा काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होकर अपनी पसंद के विकल्प भरने और सीट लॉक करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 34 हजार अभ्यर्थियों ने राज्य की पहली काउंसलिंग के लिए पंजीकरण कराया था।

चार मेडिकल कॉलेजों की सीट व्यवस्था पर विवाद

यह मामला अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिले के लिए लागू विशेष सीट व्यवस्था से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर रोक लगाई है। अदालत के आदेश के अनुसार, काउंसलिंग को राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू आरक्षण व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है और दाखिले अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रहेंगे।

इन चारों कॉलेजों के नाम उत्तर प्रदेश NEET UG 2026 के आधिकारिक संस्थान पोर्टल पर भी सूचीबद्ध हैं।

चंद्रशेखर आजाद ने सरकार से की बड़ी मांग

इस मामले पर आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इन चार मेडिकल कॉलेजों में SC/ST विद्यार्थियों के लिए विशेष सीट व्यवस्था का मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है।

आजाद के अनुसार, 1 सितंबर को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पुरानी सीट व्यवस्था जारी रखने का उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला विद्यार्थियों के संघर्ष और एकजुटता का परिणाम था। उन्होंने दावा किया कि इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में Special Component Plan के तहत प्राप्त धनराशि और SC/ST विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था का उल्लेख पूर्व की न्यायिक कार्यवाही में सरकारी पक्ष की ओर से भी किया गया था।

उन्होंने सरकार से तत्काल अध्यादेश लाकर चारों मेडिकल कॉलेजों में SC/ST विद्यार्थियों की विशेष सीट व्यवस्था को कानूनी संरक्षण देने की मांग की है। आजाद ने कहा कि इस व्यवस्था को केवल शासनादेश के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए और विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों को लेकर बनी अनिश्चितता दूर की जानी चाहिए।

छात्रों को फिर भरना होगा विकल्प

हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुराना सीट आवंटन रद्द होने से पहले सीट प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को भी नई प्रक्रिया में शामिल होना होगा। उन्हें दोबारा विकल्प भरकर सीट लॉक करनी होगी। नई प्रक्रिया के लिए संशोधित काउंसलिंग कार्यक्रम जारी किया गया है।

इस बदलाव से उन छात्रों पर भी असर पड़ा है, जिन्होंने पहले ही काउंसलिंग में आवेदन किया था और सीट के लिए फीस जमा कर दी थी। अब उन्हें संशोधित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई करनी होगी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला पूरा शेड्यूल

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का आदेश 16 सितंबर को आया था। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय ने पुराने सीट आवंटन को रद्द करते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने की कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण की नई काउंसलिंग 21 सितंबर तक जारी रहेगी।

मामले की अगली न्यायिक कार्यवाही में चारों मेडिकल कॉलेजों की विशेष आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल छात्रों को नई काउंसलिंग प्रक्रिया और आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा।

 

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