UGC के नए नियमों पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट में बोली- फिर से करेंगे विचार; 4 हफ्ते टली सुनवाई
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी दी है। सरकार ने अदालत को बताया कि UGC के 2026 के नियमों पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है। इसके लिए एक कमेटी का गठन भी किया जा सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे सभी युवा संतुष्ट महसूस करें।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि सरकार नियमों की समीक्षा कर रही है। इसका उद्देश्य छात्रों की चिंताओं का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वर्ग में असंतोष या चिंता की स्थिति पैदा न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए टाली सुनवाई
केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। यह मामला ‘अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ’ और इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं से संबंधित है।
दरअसल, साल 2019 में रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दोनों छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसरों में कथित जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। याचिकाओं में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और छात्रों को सुरक्षा देने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी।
इन याचिकाओं पर विचार-विमर्श के बाद UGC ने जनवरी 2026 में नए नियम अधिसूचित किए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को नए नियमों पर लगाई थी रोक
UGC के नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन पर रोक लगा दी थी। अदालत ने नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ संभावित भेदभाव को लेकर उठाई गई चिंताओं पर विचार करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल UGC के 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे।
क्या है UGC के नए नियमों पर विवाद?
विवाद की मुख्य वजह UGC के नए नियमों के रेगुलेशन 3(1)(c) के तहत जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा है। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार पर विशेष ध्यान दिया गया था।
सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं ने इस प्रावधान पर सवाल उठाते हुए दलील दी थी कि नियमों का मौजूदा ढांचा भेदभावपूर्ण हो सकता है और इससे गैर-आरक्षित वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है।
वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विशेष सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
केंद्र सरकार पहले भी दे चुकी है समीक्षा का संकेत
UGC के नए नियमों को लेकर विवाद के बीच केंद्र सरकार इससे पहले अगस्त 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी थी कि इन नियमों पर दोबारा विचार किया जा रहा है।
अब सरकार ने एक बार फिर समीक्षा की बात कही है और कमेटी गठन की संभावना भी जताई है। ऐसे में आने वाले दिनों में UGC के नए नियमों में बदलाव को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है। फिलहाल छात्रों और शिक्षण संस्थानों की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।
