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सुप्रीम कोर्ट फिर दोहराएगा अपना इतिहास, तीसरी बार बैठेगी महिला जजों की बेंच

सुप्रीम कोर्ट फिर दोहराएगा अपना इतिहास, तीसरी बार बैठेगी महिला जजों की बेंच

देश की शीर्ष अदालत में वर्तमान में केवल तीन महिला न्यायाधीश हैं: जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस बेला त्रिवेदी. जबकि जस्टिस कोहली का कार्यकाल सितंबर 2024 तक है, जस्टिस त्रिवेदी जून 2025 तक पद संभालेंगी.

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर इतिहास दोहराने जा रहा है और देश के सबसे बड़ी अदालत के इतिहास में शायद तीसरी बार आज गुरुवार को एक ऐसी बेंच बैठेगी जिसमें सभी जज महिला ही होंगी यानी पूरी तरह से महिला बेंच. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कल बुधवार को जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच गठित की है.

पहली बार सुप्रीम कोर्ट में 2013 में एक महिला बेंच बनाई गई थी, जब जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई एक साथ बैठे थे. इसके बाद कोर्ट के इतिहास में दूसरा मौका 2018 में आया, जब जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने 5 सितंबर को एक बेंच साझा की.

जस्टिस कोहली और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच के पास 32 मामले सूचीबद्ध हैं, जिसमें वैवाहिक विवादों से जुड़ी 10 स्थानांतरण याचिकाएं (transfer petitions) और 10 जमानत मामले (bail matters) शामिल हैं.

देश की शीर्ष अदालत में वर्तमान में केवल तीन महिला न्यायाधीश हैं: जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस बेला त्रिवेदी. जबकि जस्टिस कोहली का कार्यकाल सितंबर 2024 तक है, जस्टिस त्रिवेदी जून 2025 तक पद संभालेंगी. जस्टिस नागरत्ना 2027 में देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने वाली हैं.

सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान समय में 34 की स्वीकृत जजों के मुकाबले 27 न्यायाधीशों की कार्य क्षमता है. यानी की 7 पोस्ट खाली है. अगले महीने यह रिक्ति बढ़कर आठ हो जाएगी क्योंकि जस्टिस एस अब्दुल नजीर अगले साल 4 जनवरी को रिटायर होने वाले हैं. अगले साल सात और जस्टिस भी रिटायर होंगे, जबकि जस्टिस नजीर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे.

शीर्ष अदालत में 1989 में पहली बार किसी महिला जस्टिस की नियुक्ति की गई थी. जब जस्टिस एम फातिमा बीवी को केरल हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया गया था. उनके बाद जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस कोहली, जस्टिस नागरत्न और जस्टिस त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट में जज बनाई गईं. आखिरी तीन जस्टिस को एक ही दिन (2 सितंबर, 2021) भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एन वी रमना के कार्यकाल के दौरान शपथ दिलाई गई थी, जिसमें जस्टिस बनर्जी सहित महिला न्यायाधीशों की संख्या ऐतिहासिक चार हो गई थी.

जस्टिस इंदिरा बनर्जी इसी साल 23 सितंबर को रिटायर हुई थीं. जस्टिस कोहली शीर्ष अदालत में पदोन्नति से पहले तेलंगाना हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश थीं. जस्टिस त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले गुजरात हाईकोर्ट की जज थीं.


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