किसानों का 3050 करोड़ दबाकर बंद हो गई शुगर मिलें, 14 दिन के अंदर बकाया भुगतान का है प्रावधान

 

हर साल की तरह इस साल भी मेरठ मंडल की शुगर मिलें किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान दबाकर बंद हो गई। कोरोना काल में पहले से ही परेशान चल रहे किसान गन्ना बकाया भुगतान नहीं होने से और भी ज्यादा बेहाल हो गए हैं। मिलों ने 1 जून तक खरीदे 5149 करोड़ रुपये के गन्ने का केवल 2098 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। मिलों के पास किसानों का करीब 3050 करोड़ रुपया दबा है। शासन ने भी मिलों को नोटिस देकर इतिश्री कर ली है।

उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद अधिनियम में गन्ना खरीदने के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद बकाया पर 15 फीसदी विलंब ब्याज देय होता है। इतना सख्त कानून होने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री बेखौफ होकर किसानों को हर साल खून के आंसू रुलाती है।

भुगतान का जो हाल पिछले साल हुआ था, इस साल उससे भी बुरा है। मेरठ मंडल की बागपत शुगर मिल को छोड़कर बाकी सभी 15 शुगर मिल पेराई सत्र 2019-20 का समापन कर बंद हो चुकी हैं। इन मिलों ने खरीदे गए गन्ने के देय मूल्य के सापेक्ष केवल 41 फीसदी का ही भुगतान किया है। 59 फीसदी बकाया मिलों की तिजोरी में बंद हो गया है।

जनपद की मिलों पर भी 1245 करोड़ बकाया
मेरठ जनपद की मिलों ने भी गन्ना मूल्य भुगतान करने में तेजी नहीं दिखाई है। दौराला शुगर मिल को छोड़कर बाकी मिलों ने तिजोरी का मुंह नहीं खोला है। सबसे कम भुगतान किनौनी शुगर मिल ने किया है। पिछले दिनों शासन ने पेमेंट करने के नोटिस मिलों को भेजे थे।

इसमें हीलाहवाली करने वाली मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। लेकिन अभी तक मिलों ने नोटिस पर संज्ञान तक नहीं लिया है। इसी से पता चलता है कि शुगर इंडस्ट्री शासन के नोटिसों को कितना तरजीह देती है।

चीनी बिक्री नहीं होने का रो रहे रोना
शुगर इंडस्ट्री कोरोना के चलते चीनी बिक्री नहीं होने की बात कह रही है। मिल प्रबंधन का भी कहना है कि जब तक चीनी नहीं बिकेगी, तब तक वह भुगतान करने की स्थिति में नहीं होंगे।
क्या बोले किसान नेता
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह का कहना है कि हर मिल की सीसी लिमिट होती है। मिलों के पास चीनी के अलावा एथनॉल, अल्कोहल और गन्ने के सह उत्पाद शीरा, खोई, कोजनरेशन आदि से भी पैसा आता है। लेकिन इनकी नीयत किसानों का हक दबाने की हो गई है। कोरोना काल में फूड वॉरियर बनकर उभरे किसानों का तो सरकार को अविलंब भुगतान कराना चाहिए।

रालोद के प्रदेश संगठन महासचिव डॉक्टर राजकुमार सांगवान का कहना है कि शुगर इंडस्ट्री लॉकडाउन का फायदा उठा रही है। किसानों के प्रदर्शन और घेराव का इन्हें खतरा नहीं है। सरकार ने भले ही कोरोना संक्रमण काल में किसानों के लिए आर्थिक ना पैकेज दिया हो, लेकिन उनके गन्ने का पेमेंट तो कराया जाना चाहिए।

क्या बोले अधिकारी
सभी मिलों को बकाया भुगतान करने के लिए नोटिस तामील कराए गए हैं। हाल ही में मिलें बंद हुई हैं। भुगतान के लिए पूरा दबाव बना रखा है। – राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

 

 
 

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