रजवी के बयान पर सुफियान निजामी का जवाब, कहा- ‘इस्लाम में महिलाओं को आजादी, सोच बदलने की जरूरत’

रजवी के बयान पर सुफियान निजामी का जवाब, कहा- ‘इस्लाम में महिलाओं को आजादी, सोच बदलने की जरूरत’

मौलाना शाहबुद्दीन रजवी के इस बयान पर कि ‘मुस्लिम महिलाओं को सियासी दलदल से दूर रहना चाहिए’ पर लखनऊ के दारुल उलूम फरंगी महल के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी ने अपने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि कुछ लोग गैर-राजनीतिक होते हुए भी सियासी दबाव में आकर इस तरह की बयानबाजी करते हैं. उनके अनुसार, कि मुस्लिम महिलाओं को सियासत में नहीं आना चाहिए, यह पूरी तरह अज्ञानता भरा बयान है.

इस्लामी में महिलाओं को आगे बढ़ने की अनुमति

मौलाना सुफियान निजामी ने स्पष्ट किया कि मजहब-ए-इस्लाम ने शरई हदूद और दायरे में रहते हुए महिलाओं को पूरी अनुमति दी है कि वे इस्लामी उसूलों और जाब्तों के मुताबिक किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं. साथ ही भारतीय संविधान भी महिला और पुरुष के बीच किसी तरह के भेदभाव की इजाजत नहीं देता.

उन्होंने आगे कहा कि देश में आजादी के बाद से अब तक महिलाओं ने बड़े-बड़े पदों पर रहकर देश की बागडोर संभाली है और दुनिया के सामने मिसाल पेश की है. उन्होंने बेगम हजरत महल और नजमा हेपतुल्ला जैसी हस्तियों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में देश की राष्ट्रपति भी एक महिला ही हैं. इसलिए इस तरह के बयान देने वालों को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने की जरूरत है.

‘मुस्लिम महिलाओं के साथ भी समान्य व्यवहार हो’

मौलाना सुफियान निजामी ने यह भी कहा कि जिस भी सियासी दबाव के कारण ऐसे बयान दिए जा रहे हैं, उससे ऊपर उठकर महिलाओं की कयादत और उनके उत्थान की बात करनी चाहिए. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कोई ऐसी नीति या कानून बनता है जिसमें मुस्लिम महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह उन दावों के विपरीत होगा जो तीन तलाक के समय उनके उत्थान को लेकर किए गए थे. उन्होंने कहा कि कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिए और मुस्लिम महिलाओं के साथ भी वही व्यवहार होना चाहिए जो अन्य धर्मों की महिलाओं के साथ किया जाता है.


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