TMC के नाम-सिंबल विवाद पर राहुल गांधी को सुधांशु त्रिवेदी का जवाब, बोले- ‘अपनी ही पार्टी का इतिहास नहीं जानते’
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा था। अब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है।
त्रिवेदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी का बयान यह दिखाता है कि उन्हें अपनी ही पार्टी के इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के उस आरोप पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी दलों को कमजोर करने और तोड़ने का काम कर रहे हैं।
त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी ने शिवसेना और एनसीपी के बाद अब टीएमसी को लेकर भी बीजेपी पर आरोप लगाया है, जबकि उनके अनुसार टीएमसी और एनसीपी दोनों का गठन कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। उन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर ध्यान देने की सलाह दी।
राहुल गांधी ने लगाया था ‘पार्टी चोरी’ का आरोप
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब टीएमसी के मामले में एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है। उनके मुताबिक, बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी दलों को तोड़ते हैं और फिर उनके चुनाव चिह्न पर रोक लगाई जाती है।
राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ बताते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया था। ये राहुल गांधी के आरोप हैं; चुनाव आयोग के आदेश में हालांकि इस कार्रवाई को टीएमसी के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को समान स्थिति में रखने की अंतरिम व्यवस्था बताया गया है।
EC ने क्यों फ्रीज किया TMC का नाम और चुनाव चिह्न?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को जारी अंतरिम आदेश में कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। आयोग ने अंतिम निर्णय होने तक दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है।
दोनों गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए तीन-तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव आयोग की सूची में उपलब्ध स्वतंत्र चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा गया था। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय तक अंतरिम रूप से लागू रहेगी।
इस तरह TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद फिलहाल चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय तक जारी रहेगा।
