यूपी में सपा के ‘होमवर्क’ पर होगा सीटों का बंटवारा, सभी 403 विधानसभा पर जीत का फॉर्मूला तय करने में जुटी पार्टी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सपा बड़ी तैयारी में जुटी है। सभी 403 सीटों पर जातीय समीकरण, संगठन के फीडबैक और सर्वे आदि के माध्यम से सफलता का होमवर्क पूरा किया जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव कई बार दोहरा चुके हैं कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा राजनीतिक समझौते, दावे और हिस्सेदारी से आगे बढ़कर ‘जिताऊ’ के पैमाने पर किया जाएगा।
इसके लिए कांग्रेस से उसके दावे वाली सीटों की सूची और संभावित दावेदारों के नाम देने के लिए कहा गया है। इन दोनों को सपा अपनी रिपोर्ट के आधार पर परखेगी और फिर तय किया जाएगा कि कौनसी सीट पर किस पार्टी की टिकट से कौनसा उम्मीदवार लड़ेगा।
सपा और कांग्रेस का गठबंधन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ चुका है। वर्ष 2017 में गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। परंतु पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन ने बड़ी सफलता मिली थी। सपा 37 और कांग्रेस छह सीटें जीतने में सफल रही थी।
गठबंधन के इसी प्रदर्शन के कारण भाजपा केंद्र में अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गई। सपा का मानना है कि विधानसभा चुनाव का गणित लोकसभा से अलग होता है। इसमें स्थानीय नेतृत्व, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और क्षेत्रीय समीकरण अधिक प्रभावी रहते हैं। इसके चलते ही पार्टी एक-एक विधानसभा क्षेत्र की माइक्रो मैपिंग कर रही है।
पिछले चुनावों के परिणाम, हार-जीत का अंतर, लोकसभा चुनाव में मिले वोट, सामाजिक समीकरणों से लेकर संभावित जिताऊ चेहरों का अलग-अलग अध्ययन कराया जा रहा है। सुरक्षित सीटों सहित बहुत सी सीटों पर सपा यह ‘होमवर्क’ लगभग पूरा कर चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक पिछले लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे पर लंबी खींचतान हुई थी। वर्ष 2027 के चुनाव में खींचतान की नौबत न आए, इसके लिए पहले से ही तथ्य आधारित मॉडल तैयार किया जा रहा है, ताकि निर्णय भावनाओं नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर हो।
सूत्रों के मुताबिक सोमवार को दिल्ली में हुई आईएनडीआईए की बैठक में सपा प्रमुख ने इसी फार्मूले पर आगे बढ़ने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से बड़ा दिल दिखाने और दोनों दलों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही थी। दाेनों दलों का शीर्ष नेतृत्व इस दिशा में आगे बढ़ने पर लगभग सहमत है।
सीट बंटवारे की इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जरूरत पड़ने पर किसी सीट पर कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर सपा समर्थित चेहरा उतारा जा सकता है, जबकि किसी सीट पर सपा के टिकट पर कांग्रेस पृष्ठभूमि के उम्मीदवार को मैदान में लाने का विकल्प भी खुला रखा गया है। जिससे विपक्षी मतों की गोलबंदी हो सके और भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतरे। सपा ने पिछले चुनावों में कुछ सीटों पर यह प्रयोग आजमाया था, अब इसे विस्तार देने की कोशिश होगी।
