मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 1134 करोड़ की खरीद में 250 करोड़ का घोटाला
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। पिछले तीन वर्षों (2023 से 2026) के दौरान जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीद में 1134 करोड़ रुपये की खरीद में 250 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। विभागीय समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, यदि ये खरीद औसत और सही बाजार दरों पर की जाती, तो 250 करोड़ रुपये की बचत की जा सकती थी।
विशेष ऑडिट और डेटा विश्लेषण के दौरान यह पाया गया कि कई छोटे निकायों ने जरूरत न होने पर भी डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये के कचरा वाहन खरीदे। एक निकाय ने जो कचरा वाहन दो लाख रुपये में खरीदा, वही वाहन दूसरे निकाय ने छह लाख रुपये में खरीदा।
एलईडी लाइट्स की खरीद में भी भारी गड़बड़ी हुई है। 200 एलईडी लाइट्स की कीमत 60 लाख रुपये तक पहुंच गई, जबकि इनकी सही कीमत 306 रुपये होनी चाहिए थी। इसके अलावा, पांच रुपये प्रति लीटर मिलने वाले केमिकल को कुछ स्थानों पर 33,500 रुपये प्रति लीटर की दर पर कागजों में दर्शाया गया।
इस मामले में सरकार ने 138 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। सात अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया, 76 की वेतनवृद्धि रोकी गई, और 80 ठेकेदारों/फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन दिया है।
