एफएटीएफ: पाक पर कार्रवाई को लेकर दो गुटों में बंटे सदस्य देश

 
पाकिस्तान को काली सूची में डालने के मुद्दे पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के 39 सदस्य देश और क्षेत्रीय समूह दो गुट में बंट गए हैं। एक तरफ चीन, मलेशिया और तुर्की जैसे देश अपने सहयोगियों के साथ पाकिस्तान को बचाने की कवायद में जुट गए हैं। दूसरी तरफ, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देश पाक के खिलाफ कार्रवाई कर उसे कड़ा संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं।

इस मामले से जुड़े सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को एफएटीएफ ने 18 जून को ही ग्रे सूची में डालकर आतंकियों की फंडिंग व उन पर कार्रवाई के लिए पर्याप्त वक्त दिया गया था। लेकिन बृहस्पतिवार-शुक्रवार को हुई एफएटीएफ की बैठक में सदस्य देशों के बीच गुटबंदी हो जाने के चलते इस वैश्विक निगरानी संस्था को क बार फिर पाकिस्तान को आतंकी तंत्र पर कार्रवाई के लिए चार महीने की मोहलत देनी पड़ी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बैठक के दौरान चीन, तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान को कार्रवाई के लिए और वक्त दिए जाने का दबाव बनाया। हालांकि एफएटीएफ के मुताबिक, ग्रे सूची में आने के बाद पाकिस्तान को जो एक्शन प्लान दिया गया था, उसके 27 में से 22 बिंदुओं पर पाकिस्तान फेल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, चीन, तुर्की और मलेशिया ने एफएटीएफ को भरोसा दिलाया है कि पाकिस्तान अगले चार महीने में इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करेगा।

बता दें कि एफएटीएफ उन देशों की निगरानी करती है, जिनका रिकार्ड मनी लान्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर अंकुश लगाने में खराब रहा है। पाकिस्तान इस सूची में सबसे अव्व्ल है। पिछले एक साल से पाकिस्तान के कमजोर साबित होने के चलते भारत के अलावा फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे  देश उसे ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई के पक्ष में है।

 
 

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