अफगानिस्तान में समावेशी सरकार का गठन नहीं होने के पीछे ISI: तालिबानी नेता

अफगानिस्तान में समावेशी सरकार का गठन नहीं होने के पीछे ISI: तालिबानी नेता
  • तालिबान में ही एक धड़ा इमरान सरकार या उनके आईएसआई (ISI) चीफ की अंतरिम सरकार में दखलंदाजी से खुश नहीं है.

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान राज की वापसी पर भले ही पाकिस्तान बेहद उत्साहित है, लेकिन ऐसा लगता है कि तालिबान में ही एक धड़ा इमरान सरकार या उनके आईएसआई चीफ की अंतरिम सरकार में दखलंदाजी से खुश नहीं है. इसका प्रमाण तालिबान के उप रक्षा मंत्री मुल्ला फजल का कथित तौर एक ऑडियो क्लिप है, जिसमें वह पाकिस्तान की खुफिया संस्था के प्रमुख फैज हमीद का जिक्र कर समावेशी सरकार का गठन नहीं हो पाने का ठीकरा फोड़ रहे हैं. वह साफ-साफ लफ्जों में कहते हैं कि एक पंजाबी मेहमान (फैज हमीद) ने एक समूह के लिए बड़ी समस्या पैदा की और समावेशी सरकार के गठन को रोका.

फैज और तालिबान कमांडरों के बीच संघर्ष भी हुआ
ऑडियो फाइल में काबुल के राष्ट्रपति भवन में जनरल फैज हमीद के अंगरक्षकों और तालिबान कमांडरों के बीच सशस्त्र संघर्ष का भी उल्लेख है. राहा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक ऑडियो फाइल जारी की है, जिसमें उन्होंने देश में एक पंजाबी अतिथि की उपस्थिति की आलोचना की और कहा कि उन्होंने तालिबान को एक समावेशी सरकार बनाने की अनुमति नहीं दी. ऑडियो फाइल में तालिबान अधिकारी ने अन्य तालिबान कमांडरों को बताया कि पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समूह की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है. हक्कानी गुट को प्रमुखता देने की पाकिस्तानी रीत-नीत ने तालिबान के एक धड़े को असहज कर दिया है. यह ऑडियो क्लिप इसी का प्रमाण मानी जा रही है.

तालिबान के ऐलान के बावजूद नहीं गठित हो सकी समावेशी सरकार
पाकिस्तान और तालिबान के बीच मतभेद इस बात पर होने की संभावना है कि हाल ही में तालिबान ने नई कैबिनेट का ऐलान किया है.  पाकिस्तान ने कथित तौर पर हक्कानी और क्वेटा तालिबान परिषद के कुछ सदस्यों को कैबिनेट में शामिल होने के लिए नामित किया है. तालिबान ने पहले घोषणा की थी कि वे एक समावेशी सरकार बनाएंगे, लेकिन समूह द्वारा अपनी नई सरकार की घोषणा करने से पहले पाकिस्तानी खुफिया प्रमुख जनरल फैज हमीद काबुल पहुंचे और तालिबान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. तालिबान ने पिछले मंगलवार को अपनी नई अंतरिम सरकार की घोषणा की, जिसमें उसके मंत्रिमंडल में कोई गैर-तालिबान या महिला सदस्य शामिल नहीं हैं. हालांकि तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने कहा कि सरकार समावेशी है, क्योंकि इसमें अफगानिस्तान के विभिन्न जातीय समूहों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

कैबिनेट की घोषणा में देरी तालिबान में बड़े संकट का संकेत
इससे पहले की रिपोर्टों में सुझाव दिया गया था कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) एजेंसी के प्रमुख फैज हमीद सरकार गठन से पहले बरादर और हक्कानी समर्थित समूहों के बीच संघर्ष के बाद काबुल पहुंचे थे, जिसमें बरादर घायल हो गए थे. 1945 की वेबसाइट में माइकल रुबिन के अनुसार हक्कानी और कई अन्य तालिबान गुट हैबातुल्लाह अखुंदजादा को अपना नेता स्वीकार नहीं करते हैं. रुबिन के मुताबिक तालिबान ने कहा था कि वह 3 सितंबर को अपनी नई सरकार का अनावरण करेगा. अखुंदजादा की नियुक्ति के किसी भी आधिकारिक शब्द के बिना दिन बीत गया, जिसे समूह के प्रतिनिधियों ने पहले संकेत दिया था कि कंधार में स्थित इस्लामिक अमीरात का सर्वोच्च नेता होगा. इस देरी ने तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के काबुल में राजनीतिक नेता बनने के प्रयासों को भी स्थगित कर दिया. उन्होंने कहा कि देरी तालिबान के भीतर बहुत बड़े संकट का संकेत हो सकती है.


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