नेपाल के नए नक्शे पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया, स्वीकार नहीं है ऐसी हरकत

 

 

  • नेपाल ने नए नक्शे में भारत के तीन इलाकों के हिस्से को भी दिखाया है
  • इसपर भारत केविदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसी हरकतें स्वीकार नहीं हैंट
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाल को भारत की अखंडता का सम्मान करना चाहिए
  • भारत ने कहा है कि इस सीमा विवाद का हल बातचीत से ही निकाला जा सकता है

नई दिल्ली
लिपुलेख विवाद के बाद नेपाल ने अपने देश का नया नक्शा जारी किया है जिसमें भारत के 395 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र नेपाल में दिखाया गया है। भारत ने इस हरकत पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता में इस तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि इस सीमा विवाद का हल बातचीत के माध्यम से निकालने के लिए आगे बढ़ना होगा। दरअसल रक्षा मंत्री ने जब लिपुलेख से कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते का उद्घाटन किया, तभी नेपाल ने इसका विरोध किया था। नेपाल तथ्यहीन बातों से इस हिस्से को अपना बता रहा है।

मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि नेपाल द्वारा जारी किया गया नया नक्शा किसी ऐतिहासिक तथ्य पर आधारित नहीं बल्कि मनगढ़ंत है। यह मामला दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए ही सुलझाना है। इस तरह की हरकत भारत की तरफ से स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘नेपाल को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। नेपाल के नेतृत्व को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे बैठकर बात हो सके।’

NBT

नेपाल का नया नक्शा
नक्‍शे में 395 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया
नेपाल ने अपने नए नक्‍शे में कुल 395 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया है। लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी के अलावा गुंजी, नाभी और कुटी गांवों को भी शामिल किया गया है। नेपाल के नए नक्‍शे में कालापानी के कुल 60 वर्ग किलोमीटर के इलाके को अपना बताया है। इसमें लिंपियाधुरा के 335 किलोमीटर के इलाके को जोड़ दें तो यह कुल 395 वर्ग किलोमीटर हो जाता है। इस तरह से नेपाल ने भारत के 395 किलोमीटर के इलाके पर अपना दावा ठोका है। इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्‍व में कैबिनेट की बैठक के दौरान इस मैप को मंजूरी दी गई थी।

झूठ बोल रहा नेपाल!
नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। सुगौली बिहार के बेतिया यानी पश्चिम चंपारण में नेपाल सीमा के पास एक छोटा सा शहर है। इस संधि में तय हुआ कि काली या महाकाली नदी के पूरब का इलाका नेपाल का होगा। बाद में अंग्रेज सर्वेक्षकों ने काली नदी का उदगम स्थान अलग-अलग बताना शुरू कर दिया। दरअसल महाकाली नदी कई छोटी धाराओं के मिलने से बनी है और इन धाराओं का उदगम अलग-अलग है। नेपाल का कहना है कि कालापानी के पश्चिम में जो उदगम स्थान है वही सही है और इस लिहाज से पूरा इलाका उसका है। दूसरी ओर भारत दस्तावजों के सहारे साबित कर चुका है कि काली नदी का मूल उदगम कालापानी के पूरब में है।

 
 

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