HC का सभापति को आदेश- नसीमुद्दीन की अयोग्यता संबंधी याचिका पर 15 दिन में लें फैसला

 

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति को बसपा से निष्कासित विधान परिषद के सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सदस्यता के अयोग्य घोषित करने सम्बन्धी पार्टी की याचिका पर 15 दिन के अंदर फैसला लेने को कहा है।

न्यायमूर्ति पी.के. जायसवाल और न्यायमूर्ति डी.के. सिंह की पीठ ने कहा कि अगर विधान परिषद के सभापति तय मीयाद के अंदर फैसला नहीं लेते हैं, तो अदालत को याचिकाकर्ता बसपा की याचिका पर विचार करना पड़ेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चन्द्र मिश्र और उनके सहायक वकील सुनील कुमार चौधरी ने बसपा की तरफ से पैरवी करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही यह व्यवस्था दे चुका है कि अयोग्यता सम्बन्धी याचिकाओं का निपटारा तीन महीने के अंदर हो जाना चाहिये। वकीलों ने कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के मामले में सभापति ने अपना फैसला 29 मई 2019 को सुरक्षित कर लिया था और अभी तक उसे सुनाया नहीं।

याचिका में कहा गया है कि सिद्दीकी 23 जनवरी 2015 को बसपा के टिकट पर विधान परिषद के सदस्य बने थे, मगर 22 फरवरी 2018 को उन्होंने बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। उसके बाद बसपा ने सिद्दीकी की सदस्यता रद्द करने के लिये विधान परिषद के अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल की थी।

 
 

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