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Hathras Case News: हाथरस मामले पर फैसला सुरक्षित, चीफ जस्टिस ने कहा- किसी अन्य अर्जी पर विचार नहीं होगा

 

लखनऊ । हाथरस के बूलगढ़ी गांव में दलित युवती के साथ कथित दुष्कर्म के दौरान मारपीट के कुछ दिन बाद उसकी मौत के मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिका डाली गई हैं। हाथरस केस की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण की सभी सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट को करने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने याचिका पर आज सुनवाई के दौरान कहा कि अब इस केस की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट करे। इतना ही नहीं वह इस केस पर निर्णय भी ले। इस प्रकरण में अब तो इलाहाबाद हाई कोर्ट का सुनवाई करना बेहतर है। इस प्रकरण में किसी भी वादी के न्याय का अधिकार तो इलाहाबाद हाई कोर्ट के क्षेत्र में ही है। याचिका में गवाहों को सुरक्षा का आदेश देने की मांग की गई थी। मांग थी कि परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रखा जाए। इस दौरान पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के मामले में उन्नाव केस की दलील दी गई।

हाथरस के बूलगढ़ी के पीडि़त परिवार की मांग है कि केस का ट्रायल दिल्ली में हो। सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह ने अपील करते हुए कहा कि परिवार को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी से सुरक्षा दी जानी चाहिए। इसके बाद चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर आरोपी कुछ कहना चाहते हैं तो वो पहले हाईकोर्ट जा सकते हैं। इतना सुनने के बाद कोर्ट ने साफ कहा कि अब किसी आवेदक को इस मामले में नहीं सुनेंगे। सभी लोगों को इलाहाबाद हाई कोर्ट जाना चाहिए। सभी लोग इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपनी मांग रखें। वहीं उनका ज्यूरिसडिक्शन है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने पीड़ित, सरकार और आरोपी को सुन लिया है, यही अहम है। बाकी किसी बाहरी को नहीं सुनेंगे। इतना कहने के साथ ही कोर्ट उठ गई और आदेश रिजर्व रख लिया है।

सुप्रीम कोर्ट में पीड़िता के परिवार की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि गवाहों और परिवार को सुरक्षा दी जाए, स्टेटस रिपोर्ट सीधे अदालत को मिले। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार सीबीआई जांच से गुरेज नहीं कर रही है, पूरा सहयोग कर रह है। परिवार को सुरक्षा दी गई है। जो लोग पीड़िता के परिवार का नाम, पहचान सार्वजनिक कर रहे हैं वो दंड के भागीदार है, यह अपराध है। इसे आधिकारिक दस्तावेजों से डिलीट किया जाए। जिस पर अदालत ने कहा कि उन्हेंं डिलीट कर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस मामले में कोई बाहरी और अजनबी लोग ना आएं। पीड़ित, सरकार, एजेंसी सब हैं फिर गैरजरूरी घुसपैठ क्यों। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि अभी वहां पर सुरक्षा के मामले में परिवार को सीआरपीएफ की जरूरत नहीं है। वहां पर पर्याप्त सुरक्षा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम कोर्ट के हर आदेश का पालन करेंगे।

 
 

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