इकॉनमी की रफ्तार के लिए छोटे उद्योगों को सरकार का ‘पॉवर डोज’, नवंबर तक आयकर रिटर्न

 

 

  • पहले चरण में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूती देने के लिए 6 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिया 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज
  • आवास क्षेत्र की परियोजनाओं को पूरा करने लिए ठेकेदारों, डिवेलपर को बिना हर्जाने के 6 माह का अतिरिक्त समय
  • आयकर रिटर्न भरने की समय सीमा 31 जुलाई 2020 और 31 अक्टूबर 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 की

नई दिल्ली
भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को कोरोना वायरस (Coronavirus) की मार से उबारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की मंगलवार को घोषणा की थी। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बुधवार को पहले चरण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मजबूती देने के लिए करीब छह लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की। वित्त मंत्री ने एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया है।

इसके साथ ही ढांचागत और आवास क्षेत्र की परियोजनाओं को पूरा करने लिए ठेकेदारों और डिवेलपर को बिना हर्जाने के छह महीने का अतिरिक्त समय दिया गा है। टीडीएस और टीसीएस कटौती की दर में चौथाई कमी करने, आयकर रिटर्न जमा करने का समय नवंबर तक बढ़ाने , ईपीएफओ अंशदान में सहूलियत की भी घोषणा की गई। इन उपायों से नकदी का सर्कुलेशन बढ़ने और कारोबार (Business) में आसानी की उम्मीद है।


पहले चरण का पैकेज प्रमुख रूप से छोटी मझोली इकाइयों पर केंद्रित है। इसमें एमएसएमई क्षेत्र के लिए बिना गारंटी के तीन लाख करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने और गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) को और अधिक नकदी उपलब्ध कराने के उपाय जैसी कई घोषणाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज दिया जाएगा। वित्त मंत्री सीतारमण ने इस घोषणा में औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कुटीर और लघु उद्योगों को ध्यान में रखते हुए कई घोषणाएं की।

नए कर्ज का प्रावधान
100 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे एवं मध्यम उद्योगों को कुल तीन लाख करोड़ रुपये तक का गारंटी मुक्त, सस्ती ब्याज दरों वाला सावधिक ऋण उपलब्ध कराने की घोषणा की। यही नहीं, फंसे कर्ज और दबाव झेल रहे दो लाख के करीब एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के नए कर्ज का प्रावधान किया।

पीएम मोदी के संबोधन के बाद आत्मनिर्भर बने लोग

  • पीएम मोदी के संबोधन के बाद आत्मनिर्भर बने लोग

    मंगलवार को पीएम मोदी ने रात 8 बजे देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं कीं और देशवासियों से आत्मनिर्भर बनने की अपील की। बस फिर क्या, ट्विटर वालों ने उनकी बातों को थोड़ा अलग ले लिया और ऐसे बनने लगे आत्मनिर्भर। देखिए मजेदार मीम…
  • एक और लीजिए

    मैं भी आत्मनिर्भर…
  • ऐसे तापमान चेक होगा

    आप भी ट्राय कीजिए….
  • एकदम दिन बदल गए

    पैसा ही पैसा होगा…
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    लोकल को प्रमोट करने के लिए…
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    ऐसे तो लोकल बन जाएंगे ग्लोबल….
  • कमाल ही कर दिया

    टाइमिंग तो देखिए…
  • दोनों में फर्क है

    एटीएम निर्भर और आत्मनिर्भर…
  • लोकल डेटा ट्रांसफर

    अब ऐसे ही बनेगा…
  • मकैनिकल इंजिनियर पर जोक

    वे तो पहले से ही आत्मनिर्भर हैं…
  • अब समझ आया ना

    लोकल होने का मतलब….
  • चाय तो चाय है

    लोकल को दो बढ़ावा…

 

45 लाख छोटे उद्योगों को होगा फायदा
वित्त मंत्री ने एमएसएमई को इक्विटी समर्थन उपलब्ध कराने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड्स ऑफ फंड्स बनाने की घोषणा की, जो कि विभिन्न छोटे फंड के जरिए 50,000 करोड़ रुपये तक की शेयरपूंजी डालने में सक्षम होगा। छोटे उद्योगों की हमेशा से शिकायत रही है कि उन्हें बैंकों से जरूरत के समय कर्ज नहीं मिलता है और बैंक बिना गारंटी के बैंक कर्ज नहीं देते हैं। सरकार ने इस पैकेज में तीन लाख करोड़ रुपये के कर्ज की व्यवस्था करते हुए अपने स्तर से शत-प्रतिशत गारंटी देने का वादा किया है। करीब 45 लाख छोटे उद्योगों को इस सुविधा से फायदा होगा।

जल्द भुगतान करने की घोषणा
देश के एमएसएमई क्षेत्र में करीब 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है और देश के कुल विनिर्माण क्षेत्र में इनका 45 प्रतिशत योगदान है। निर्यात में 40 प्रतिशत भागीदारी के साथ ही देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 30 प्रतिशत इन्हीं छोटे उद्योगों का योगदान है। कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन से इन उद्योगों और इनमें काम करने वाले कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर हुआ। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। इसी वजह से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने एमएसएमई उद्योग को तुरंत पैकेज दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और केंद्र सरकार पर एमएसएमई उद्योग के बकाए का भुगतान भी जल्द करने को कहा। उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए इस पैकेज में सरकारी विभागों और केंद्रीय उपक्रमों में एमएसएमई के बकाये भुगतान को 45 दिन के भीतर जारी करने की घोषणा की गई है।

इन्हें दिया गया अतिरिक्त समय
वित्त मंत्री के पैकेज में वेतन को छोड़ अन्य सभी तरह के भुगतानों पर टीडीएस, टीसीएस की दर में 25 प्रतिशत की कटौती, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के दायरे में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों में भविष्य निधि के साविधिक योगदान को वेतन के 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने, नकदी संकट से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों को 90,000 करोड़ रुपये की मदद और निर्माण ठेके लेने वाली कंपनियों को सरकारी परियोजनाएं पूरी करने के लिए अतिरिक्त छह महीने का समय भी दिया गया है। प्रधानमंत्री की ओर से घोषित कुल 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में पूर्व में घोषित 1.70 लाख करोड़ रुपये का पैकेज और आरबीआई की तरफ से घोषित उपाय भी शामिल हैं।

इस पैकेज के जरिए यह है लक्ष्य
पैकेज के जरिए सरकार का लक्ष्य दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को कोरोना संकट के प्रभाव से उबारते हुए पटरी पर लाना और आत्मनिर्भर बनाना है। छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराने के वास्ते एमएसएमई की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि अब तक ये उद्योग इस चिंता में रहते थे कि उनका कारोबार बढ़ा तो छोटे उद्योग के तौर पर उन्हें जो सुविधाएं मिल रही हैं, कहीं उनसे हाथ न धोना पड़ जाए, जिसके चलते इनकी परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। नई परिभाषा के तहत अब एक करोड़ रुपये तक के निवेश वाली इकाइयां सूक्ष्म इकाई, 10 करोड़ रुपये के निवेश वाली लघु, 20 करोड़ रुपये के निवेश वाले मझोले उद्यम की श्रेणी में आएंगे। यह परिभाषा विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में काम करने वाली इकाइयों के लिए होगी। अब तक यह सीमा क्रमश: 25 लाख रुपये, 5 करोड़ रुपये और 10 करोड़ रुपये थी।

मिलेगी 6 महीने की समयसीमा
इसके साथ ही एमएसएमई की परिभाषा में सालाना कारोबार आधारित मानदंड भी जोड़ा गया है। इसके तहत 5 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाली इकाइयां सूक्ष्म इकाइयां, 50 करोड़ रुपये के कारोबार वाली लघु और 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाली मझोली इकाइयां कहलाएंगी। ठेकेदारों को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे, सड़क परिवहन मंत्रालय और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग समेत सभी सरकारी एजेंसियां सभी ठेकेदारों को निर्माण और वस्तु एवं सेवा अनुबंधों को पूरा करने के लिए छह महीने की समयसीमा देंगी।

1- मिडिल क्लास को यूं मिल सकता है फायदा

  • 1- मिडिल क्लास को यूं मिल सकता है फायदा

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में साफ-साफ कहा था कि ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए भी है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है। यानी यहां सीधे-सीधे बात नौकरी पेशा की है। लॉकडाउन की वजह से भले ही कोई निजी कंपनी में नौकरी करता हो या भी उसकी सरकारी नौकरी हो, सबकी सैलरी कट रही है। सरकारी नौकरी में तो कटौती मामूली है, लेकिन निजी कंपनियों में नौकरी करने वालों पर तगड़ी मार पड़ी है। वैसे भी, सरकारी कर्मचारी महज 1.5 से 2 फीसदी हैं, बाकी तो निजी कंपनियों में ही काम करते हैं। इनकी सैलरी 25-30 फीसदी तक कट रही है। इंक्रिमेंट रोक दिया गया है। बहुत से लोगों को बिना सैलरी के छुट्टी यानी लीव विदआउट पे पर भेज दिया गया है। कहीं-कहीं हालात और भी खराब हैं, जहां लोगों को नौकरी से ही निकाल दिया गया है।यह भी पढ़ें- MSMEs सेक्टर को सरकार देगी 3 लाख करोड़ तक की लोन गारंटी!उम्मीद की जा रही है मोदी सरकार इस पैकेज के जरिए किसी टैक्स छूट की घोषणा करे, जिससे लोगों की जेब में अधिक पैसे बचें। जेब में अधिक पैसे होंगे तो वह खर्च करने को प्रेरित होंग, जिससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। सामान खरीदे जाने से मांग बढ़ेगी तो रोजगार भी पैदा होगा।
  • 2- MSME के लिए क्या?

    माना जा रहा है कि मोदी सरकार के इस 20 लाख करोड़ के खास पैकेज में सबसे अधिक ध्यान एमएसएमई का ही रखा गया है। इस सेक्टर में सबसे अधिक रोजगार पैदा होता है। यह भी ध्यान रखने की बात है कि बहुत सारे एमएसएमई तो पंजीकृत भी नहीं हैं, जिनके रोजगार का आंकड़ा भी मौजूद नहीं होता। लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद है, जिसके चलते इकोनॉमी की रफ्तार थम सी गई है।इकोनॉमी को पुश स्टार्ट देने के लिए जरूरी है कि एमएसएमई को मदद दी जाए, जिससे बहुत सारे लोगों को रोजगार मिले। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि इस पैकेज के तहत मुद्रा लोन का दायरा बढ़ाया जाया सकता है और इस सेक्टर को बिना गारंटी के ही लोन दिया जा सकता है। यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस सेक्टर के लिए करीब 3 लाख करोड़ की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जा सकती है।
  • 3- अन्नदाता के चेहरे पर यूं लाई जा सकती है खुशहाली

    मोदी सरकार किसानों को कभी नहीं भूलती, वह अन्नदाता जो है। लेकिन किसान पर कोरोना की मार के अलावा भी उसे तमाम चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। एक ओर कोरोना की वजह से पॉल्ट्री फार्म का बिजनेस तबाह हो गया, मछली पालन में सिर्फ नुकसान हो रहा है, वहीं बारिश और ओलों ने बची-खुसी कसर पूरी कर दी और फसलें तबाह कर दीं। कोरोना की वजह से सब्जियों की मांग भी घटी है। सब्जियों को मंडियों तक नहीं पहुंचा पाने की चलते भी कई जगहों पर तो किसानों को अपने गोभी-टमाटर की खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा है। कोरोना के चलते पहले तो गेहूं की कटाई के लिए लेबर नहीं मिली और जैसे-तैसे लेबर मिली भी, तो गेहूं से लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियां मंडी में खड़ी रहीं। इसी बीच आंधी-तूफान-बारिश ने हालात को बद से बदतर बना दिया। मोदी सरकार अपने इस पैकेज में किसानों के लिए कर्जमाफी या अतिरिक्त डायरेक्ट पैसे ट्रांसफर कर सकती है, जिससे अन्नदाता के चहरे पर खुशहाली आ सके।
  • 4- कुटीर उद्योग को ऐसे मिलेगा सहारा

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कुटीर उद्योग का भी जिक्र किया था। ग्रामीण भारत में एक बड़ा हिस्सा है जो कुटीर उद्योग के जरिए अपनी जीविका कमाता है। लॉकडाउन ने उन पर भी बहुत ही बुरी मार की है। उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी ऐसे लोगों को कुछ आर्थिक सहायता दे सकते हैं, जिससे उन्हें राहत तो मिलेगी ही, वह कुटीर उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित भी होंगे। अपने संबोधन में पीएम ने कहा था कि जब उन्होंने देश के लोगों से खादी खरीदने के लिए कहा तो लोगों को उनका साथ दिया, उनका इशारा फिर से कुटीर उद्योग को मजबूत बनाने की ओर ही था। कुटीर उद्योग का ध्यान रखना जरूरी इसलिए है कि इस सेक्टर में जो लोग नौकरी करते हैं, वह आर्थिक रूप से बहुत अधिक संपन्न नहीं होते, जिन्हें सहारा देना जरूरी है।
  • 5- ये सब करने का असल मकसद भी समझिए

    पीएम मोदी ने इस पैकेज की घोषणा इसलिए की है, ताकि अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल सके। उनका मकसद है कि तमाम सेक्टर फिर से अपनी रफ्तार पकड़ें जिससे मांग के साथ-साथ रोजगार भी बढ़े। सबसे अधिक ध्यान ग्रामीण भारत पर देने की जरूरत है। एक तो ग्रामीण भारत में लोगों के पास पैसे कम हैं, जिससे उनकी तरफ से मांग अधिक नहीं हो पाती है। वैसे भी, अगर बात वाइट गुड्स जैसे एसी, फ्रिज की हो तो ग्रामीण भारत में बहुत ही कम लोगों के पास ये सुविधाएं हैं, जो शहरों में जीवन का अहम हिस्सा है। अब शहर में वाइट गुड्स की मांग में कोई बढ़त नहीं देखने को मिलेगी। लोग ज्यादा से ज्यादा अपने पुराने सामान बेचकर नए खरीदेंगे, जबकि ग्रामीण भारत में इनकी मांग बढ़ सकती है, अगर उनकी जेब में पैसे बढ़े। देखा जाए तो पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ के इस पैकेज से अर्थव्यवस्था को ईकोसिस्टम को मजबूत बनाने की कोशिश की है।

 

तकरीबन 12.2 करोड़ हुए बेरोजगार
बिजली क्षेत्र के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) और आरईसी वितरण कंपनियों को उनकी लेनदारी के एवज में 90,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराएंगी। यह नकदी डिजिटल भुगतान समेत अन्य सुधारों पर निर्भर करेगा। कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए सरकार ने 25 मार्च से 21 दिन के देशव्यापी बंद की घोषणा की थी। उससे आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह थम गईं। बाद में कुछ छूट के साथ बंद की अवधि 17 मई तक के लिए बढ़ाई गई। एक अनुमान के अनुसार बंद के कारण देश में अप्रैल महीने में 12.2 करोड़ लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा। उपभोक्ता मांग लगभग समाप्त हो गई।

तीन महीने के लिए की गई यह व्यवस्था
वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सभी आयकर रिटर्न भरने की समय सीमा 31 जुलाई 2020 और 31 अक्टूबर 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दी है। इसके अलावा नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के दायरे में आने वाले भविष्य निधि में 12 प्रतिशत के साविधिक योगदान को कम कर 10 प्रतिशत कर दिया गया। यह व्यवस्था तीन महीने के लिए है। सीतारमण ने कहा, ‘इससे 6.5 करोड़ प्रतिष्ठानों को लाभ होगा और नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को तीन महीने के लिए 6,750 करोड़ रुपये की नकदी मिलेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्रीय लोक उपक्रम नियोक्ता योगदान के रूप में 12 प्रतिशत का योगदान करते रहेंगे।

20 लाख करोड़ के पैकेज पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ्रेंस के हाईलाइट्स

20 लाख करोड़ के पैकेज पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ्रेंस के हाईलाइट्सवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत के लिये की गई 20 लाख रुपये के पैकेज की घोषणा की जानकारी दी। कोरोना लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये 20 लाख के पैकेज के बारे में सरकार चरण बद्ध तरीके से घोषणा वित्त मंत्री करेंगी। सरकार ने एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी लोन देने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही एमएसएमई की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है। डिस्कॉम को संकट से उबारने के लिये 90000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। टीडीएस और टीसीएम में भी मौजूदा दर में 25 फीसदी की कटौती की गई है।

 

 
 

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