शोभित विश्वविद्यालय गंगोह में वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन

शोभित विश्वविद्यालय गंगोह में वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन

गंगोह [24CN] : आज शोभित यूनिवर्सिटी गंगोह के तत्वाधान में हिंदी दिवस के अवसर पर स्कूल ऑफ़ एजुकेशन एवं स्कूल ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड लैंग्वेजेज ने सयुंक्त रूप से वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं कविता पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शोभित विश्वविद्यालय के अन्य संकायों के विद्यार्थियों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने बहुत ही उत्साहपूर्वक एवं जोश के साथ वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं कविता पाठ कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्कूल ऑफ़ एजुकेशन के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अपने स्वागत सम्बोधन में शोभित यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफ.(डॉ.) रणजीत सिंह, कुलसचिव डॉ. महिपाल सिंह , केयर टेकर सूफी ज़हीर अख्तर जी, विभिन्न संकायों से आये हुए गणमान्य फैकल्टी मेंबर्स का स्वागत किया। डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा की हिंदी दिवस भारत में हर वर्ष ’14 सितंबर’ को मनाया जाता है। हिन्दी विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के कुलपति प्रोफ.(डॉ.) रणजीत सिंह ने अपने सम्बोधन में सर्वप्रथम स्कूल ऑफ़ एजुकेशन एवं स्कूल ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड लैंग्वेजेज को इस कार्यक्रीम को आयोजित करने के लिए बधाई दी एवं कहा की आप सभी प्रशंसा के पात्र है। तत्पश्चात उन्होंने हिंदी दिवस पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में और 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत वर्ष 1949 से हुई थी। इस दिन भारत की संविधान सभा ने हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया था तब से इस भाषा के प्रचार और प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।

कुलसचिव डॉ. महिपाल सिंह ने विचार रखते हुए कह की हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा है। राष्ट्रभाषा किसी भी देश की पहचान और गौरव होती है। हिन्दी हिन्दुस्तान को बांधती है। इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसी कर्तव्य हेतु हम 14 सितंबर के दिन को ‘हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाते हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, साक्षर से निरक्षर तक प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति हिन्दी भाषा को आसानी से बोल-समझ लेता है। यही इस भाषा की पहचान भी है कि इसे बोलने और समझने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती।

इस अवसर पर सूफी ज़हीर अख्तर जी ने कहा की आजकल अंग्रेजी बाजार के चलते दुनियाभर में हिन्दी जानने और बोलने वाले को बाजार में अनपढ़ या एक गंवार के रूप में देखा जाता है या यह कह सकते हैं कि हिन्दी बोलने वालों को लोग तुच्छ नजरिए से देखते हैं। यह कतई सही नहीं है। हम हमारे ही देश में अंग्रेजी के गुलाम बन बैठे हैं और हम ही अपनी हिन्दी भाषा को वह मान-सम्मान नहीं दे पा रहे हैं, जो भारत और देश की भाषा के प्रति हर देशवासियों के नजर में होना चाहिए। इस अवसर पर नीतीश कुमार, तनु , सलमान ,वर्तिका, रीना, पूनम देवी, महताब, मुजाहिर, आयुष, अफसार अली, आदि विद्यार्थियों ने वाद-विवाद एवं कविता के माध्यम से हिंदी दिवस के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया।

कार्यक्रम का सञ्चालन कामना शर्मा बी. एड. द्वितीय वर्ष की छात्रा ने किया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड लैंग्वेजेज की डीन प्रोफ. (डॉ.) गुंजन अग्रवाल ने सभी महानुभावों का धन्यववाद प्रकट किया एवं हिंदी दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें दी। इस अवसर पर ऋतू शर्मा, अंजुम आरा,फुरकान त्यागी, डॉ. विश्वास सैनी, डॉ. अभिमन्यु उपाध्याय, राम जानकी यादव, बलराम टोंक, एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।


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