महाराष्ट्र में सरकार गठन पर कांग्रेस-एनसीपी का अभी फैसला नहीं, चर्चा के बाद आगे होगी बात

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर कांग्रेस-एनसीपी का अभी फैसला नहीं, चर्चा के बाद आगे होगी बात
हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र में शिवसेना को समर्थन देने पर कांग्रेस और शिवसेना ने अभी कोई फैसला नहीं किया है
  • शरद पवार ने कहा कि अभी वे आपस में बातचीत करेंगे और फिर शिवसेना से चर्चा करेंगे
  • कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि सोमवार को उद्धव ठाकरे ने सोनिया गांधी को फोन कर समर्थन मांगा था
  • बता दें कि राज्य में राज्यपाल की सिफारिश के बाद आज राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है

मुंबई
महाराष्ट्र में सरकार को लेकर अनिश्चितता अभी भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जहां एक तरफ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है, वहीं कांग्रेस और एनसीपी के सीनियर नेताओं की बीच हुई बैठक का भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। दोनों पार्टियों की तरफ से जारी बयान को एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने पढ़ते हुए कहा, ‘यह फैसला लेने से पहले जरूरी है कि सभी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण होना चाहिए। पहले कांग्रेस और एनसीपी कुछ बिंदुओं पर चर्चा करेंगे। उसके बाद ही शिवसेना से बात की जाएगी। इसके बाद दोनों पार्टियां शिवसेना को समर्थन देने पर फैसला लेंगी।’
पटेल ने कहा, ‘आज कांग्रेस और एनसीपी, जिन्होंने महाराष्ट्र में गठबंधन कर चुनाव लड़ा था के बीच महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर लंबी चर्चा हुई। शिवसेना ने कल (11 नवंबर 2019) करे पहली बार एनसीपी और कांग्रेस को अधिकारिक तौर पर सम्पर्क किया था। यह सम्पर्क समर्थन मांगने के लिए था। यह फैसला लेने से पहले जरूरी है कि सभी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण होना चाहिए। आज इन पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई है। दोनों पक्षों में आम सहमति बनाने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी।’


एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा, ‘हम महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव नहीं चाहते हैं। कांग्रेस से चर्चा होने के बाद भी सरकार गठन पर चर्चा होगी। आपसी सहमति के बाद यह फैसला लिया जाएगा। सरकार बनाने और सरकार चलाने के लिए पहले कुछ मुद्दों का साफ होना जरूरी है।’


इसके बाद कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा, ‘हमारे संयुक्त बयान में सब कुछ स्पष्ट है। जैसा कि बताया गया कि शिवसेना की तरफ से पहली बार कल हमसे सम्पर्क किया गया। हमारा दायित्व बनता है कि इस मामले पर पहले सहयोगी से बात करें। कल शरद पवार जी के साथ सोनिया गांधी की बात हुई। इस दौरान तय किया गया कि कुछ मुद्दें स्पष्ट होना जरूरी है। उन पर सहमति बनने के बाद ही हम शिवसेना से बात करेंगे।’

 

 

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