कोर्ट में BJP सांसद अरुण सागर फरार घोषित, 2019 में आचार संहिता के उल्लंघन का मामला

कोर्ट में BJP सांसद अरुण सागर फरार घोषित, 2019 में आचार संहिता के उल्लंघन का मामला

पुलिस ने बताया कि सांसद बन जाने के बाद बीजेपी नेता अरुण सागर ने कभी कोर्ट की नोटिस, समन या वारंट पर ध्यान नहीं दिया. हालांकि बाद में उन्होंने अपना वकील तो खड़ा किया, लेकिन वह खुद कभी हाजिर नहीं हुए.

वर्ष 2019 के चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में नामजद शाहजहांपुर से बीजेपी सांसद अरुण सागर की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गैर जमानती वारंट जारी जारी होने के बाद भी उनके हाजिर नहीं होने पर कोर्ट ने बुधवार को उन्हें फरार घोषित किया है. इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है. इस मामले में कोर्ट ने पहले जमानती वारंट जारी किया था, फिर गैर जमानती वारंट जारी किया गया. बावजूद इसके वह अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए हाजिर नहीं हुए.

जानकारी के मुताबिक 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान पूरे शाहजहां पुर में आचार संहिता लगने के बावजूद जगह जगह होर्डिंग और बैनर लगाए गए थे. इन सभी पर अरुण सागर की तस्वीर के साथ उनके और समर्थकों के नाम लिखे हुए थे. निर्वाचन विभाग के निदेश पर उस समय कांट पुलिस के दरोगा ने सांसद अरुण सागर समेत उनके सभी समर्थकों व निवेदकों के खिलाफ केस दर्ज कराया था. मामले की सुनवाई शाहजहांपुर की जिला अदालत के एसीजेएम थर्ड की कोर्ट में हुई. जहां से सांसद को अपना पक्ष रखने के लिए उन्हें कई बार समन, और जमानती वारंट जारी किए गए, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए. ऐसे में अब कोर्ट ने उन्हें फरार घोषित करते हुए पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने को कहा है.

पुलिस ने सांसद आवास पर चश्पा किया नोटिस

कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने सांसद के आवास पर नोटिस चश्पा किया है. पुलिस ने बताया कि सांसद बन जाने के बाद बीजेपी नेता अरुण सागर ने कभी कोर्ट की नोटिस, समन या वारंट पर ध्यान नहीं दिया. हालांकि बाद में उन्होंने अपना वकील तो खड़ा किया, लेकिन वह खुद कभी हाजिर नहीं हुए. ऐसे में कोर्ट ने सांसद अरुण सागर को अब फरार घोषित कर दिया है. कोर्ट ने यह कार्रवाई धारा 82 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत की है.

मुकदमा वापसी की सिफारिश

अरुण सागर ने इस संबंध में बताया कि उनके खिलाफ केवल आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा है. इस मुकदमे की वापसी के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया है. यह मामला फिलहाल सरकार की कमेटी के पास है. चूंकि अभी तक कमेटी की बैठक नहीं हो सकी है, इसलिए सरकार की ओर से मुकदमा वापसी के कोर्ट में कोई अर्जी नहीं दी गई है. उन्होंने बताया कि यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान का है. उनके किसी समर्थक ने यह होर्डिंग लगवाई होगी, लेकिन उन्हें तो इसकी जानकारी तक नहीं है.


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