सरकारी अस्पतालों में चल रहा बड़ा ‘खेल’, पूरे देश में दवाइयों की खरीद की समीक्षा कर रही केंद्र सरकार
नई दिल्ली। अस्पतालों में मरीजों से दवाओं, मेडिकल उपकरणों और इलाज में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स के लिए खरीद कीमत से अधिक राशि लिए जाने की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने खरीद व्यवस्था की समीक्षा शुरू की है। रिपोर्ट के मुताबिक समीक्षा का उद्देश्य यह समझना है कि अस्पताल इन उत्पादों को किस कीमत पर खरीदते हैं और मरीजों से उनके लिए कितनी राशि वसूली जाती है।
इस मुद्दे में खास तौर पर दवा, मेडिकल उपकरण और अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क के बीच अंतर पर ध्यान दिया जा रहा है। समीक्षा के बाद जरूरत के अनुसार अधिक वसूली को रोकने के लिए कदम उठाए जाने की बात सामने आई है।
सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाओं की उपलब्धता और खरीद व्यवस्था की निगरानी के लिए केंद्र पहले से ही विभिन्न व्यवस्थाएं चला रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार Free Drugs Service Initiative (FDSI) के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। दवाओं की खरीद, गुणवत्ता जांच, सप्लाई चेन और स्टॉक की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम और केंद्रीय डैशबोर्ड का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
केंद्र की Central Medical Services Society (CMSS) भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की केंद्रीय खरीद व्यवस्था से जुड़ी एजेंसी है। इसका उद्देश्य खरीद और वितरण प्रणाली को व्यवस्थित करना तथा कमियों को दूर करना है।
वहीं, हाल की चर्चाओं में निजी अस्पतालों में मेडिकल उत्पादों की खरीद कीमत और मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क के अंतर का मुद्दा भी सामने आया है। अस्पतालों के संगठन AHPI ने इस विषय में तथ्य आधारित और संतुलित मूल्यांकन की जरूरत बताई है और कहा है कि मेडिकल उत्पादों का MRP निर्माता निर्धारित करते हैं।
