कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को झटका, नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम पर कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले 1980 में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश से इनकार करने वाले मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को रद कर दिया है।
जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप
सोनिया गांधी पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले, 1980 में जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाया था। इसी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।
विशेष अदालत ने आदेश किया रद
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश बिना किसी ठोस कारण के दिया गया था और उसमें उचित वजहें नहीं बताई गई थीं। अदालत ने मामले को वापस एडिशनल चीफ मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया।
दोनों पक्षों को सुनकर आदेश देने निर्देश
विशेष अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों पक्षों की बात सुनने और मामले की जांच करने के बाद विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश जारी किया जाए। अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष जानने के लिए भी कहा है।
