मस्जिद प्रकरण पर सहारनपुर में दिनभर चला सियासी हाईवोल्टेज ड्रामा

मस्जिद प्रकरण पर सहारनपुर में दिनभर चला सियासी हाईवोल्टेज ड्रामा
सहारनपुर में कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार एवं सर्किट हाऊस के मुख्य द्वार पर मौजूद सुरक्षाकर्मी।

सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद प्रकरण को लेकर सोमवार को सहारनपुर में पूरे दिन सियासी हलचल तेज रही। समाजवादी पार्टी के प्रस्तावित 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मंडलायुक्त से मिलने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन की सक्रियता के चलते सर्किट हाउस से लेकर सपा नेताओं के आवास तक दिनभर हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। हालात यह रहे कि प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल लगातार सपा नेताओं की गतिविधियों पर नजर बनाए रहे।

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के निर्देश पर मस्जिद प्रकरण की जानकारी लेने और मंडलायुक्त से मुलाकात के लिए सपा का 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को सहारनपुर पहुंचना था। हालांकि, रविवार रात से ही कई सपा नेताओं के घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई थी। इसके बावजूद सोमवार को नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद लाल बिहारी यादव, सांसद नरेंद्र मलिक, सांसद इकरा हसन, पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान, विधायक उमर अली खान, आशु मलिक, सपा जिलाध्यक्ष चैधरी अब्दुल वाहिद समेत कई नेता सर्किट हाउस पहुंच गए।

सर्किट हाउस पहुंचते ही पुलिस ने सपा नेताओं को वहीं नजरबंद कर दिया। इस दौरान नेताओं और पुलिस के बीच काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। वहीं, सपा नेता शायान मसूद को सर्किट हाउस के मुख्य गेट के बाहर ही पुलिस ने रोक लिया और उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। सपा नेताओं के पहुंचने की सूचना के बाद सर्किट हाउस को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस के साथ आरआरएफ के जवानों को भी तैनात किया गया। सर्किट हाउस के आसपास पुलिस बल की मौजूदगी और नेताओं की आवाजाही को लेकर पूरे दिन राजनीतिक सरगर्मी बनी रही।

मस्जिद प्रकरण को लेकर सपा प्रतिनिधिमंडल की मंडलायुक्त से प्रस्तावित मुलाकात प्रशासन द्वारा रोके जाने के बाद पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताते हुए विरोध जताया। वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने की बात कही गई। मस्जिद प्रकरण को लेकर सोमवार को सहारनपुर में सियासत और प्रशासनिक कार्रवाई आमने-सामने दिखाई दी। दिनभर चले इस घटनाक्रम ने शहर की राजनीतिक गतिविधियों को पूरी तरह केंद्र में ला दिया। इसके अलावा कलैक्टेªट परिसर भी छावनी में तब्दील में रहा। जिला मुख्यालय को डॉग स्कायड खंगाला गया और मुख्यायल पर आने वालें लोगों की मेटल डिटेक्टर जंाच की गयी और अन्य सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहें।

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