विभाजन केवल भूमि का नहीं, संस्कृति और विरासत का भी बंटवारा था: सूर्यकांत सिंह

विभाजन केवल भूमि का नहीं, संस्कृति और विरासत का भी बंटवारा था: सूर्यकांत सिंह
सहारनपुर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हिंजामं के पश्चिम उ.प्र. प्रभारी सूर्यकांत सिंह।

सहारनपुर। हिन्दू जागरण मंच पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कहा कि भारत का विभाजन केवल भूमि, नदी, पर्वत, जनसंख्या अथवा ईंट-पत्थर के मकानों का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह सनातन संस्कृति और उसकी विरासत को प्रभावित करने वाली ऐतिहासिक त्रासदी थी। हिन्दू जागरण मंच सहारनपुर के तत्वावधान में शास्त्री नगर स्थित कार्यालय पर अखंड भारत संकल्प व विभाजन विभीषिका विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण ननकाना साहिब, हिंगलाज माता, पंजा साहिब, कटासराज, शारदा पीठ और तक्षशिला जैसे अनेक प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थल भारत से अलग हो गए। उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण सिंधी, पंजाबी, मुल्तानी और बंगाली संस्कृति की निरंतरता भी प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि 1947 की विभाजन विभीषिका से मिले सबक को याद रखते हुए देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना आवश्यक है।

सूर्यकांत सिंह ने कहा कि हिन्दू जागरण मंच “एक भूमि, एक संस्कृति, एक राष्ट्र” के संकल्प के साथ अखंड भारत के स्वरूप को स्मरण करता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और राष्ट्र के प्रति समर्पित लोगों से सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष रामदीप बंसल ने की, जबकि संचालन मनोज तिवारी ने किया। इस अवसर पर भानुप्रताप, मनोज तिवारी, कुलदीप राणा, प्रताप सिंह, देवेंद्र सिंह, घनश्याम तिवाड़ी, परमानंद, आलोक कुमार, दिग्विजय सिंह, राजवंश राणा सहित संगठन के अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।