CJI-NALSAR विवाद में बार काउंसिल का यू-टर्न, फैसले की वापसी के बाद मनन मिश्रा पर हमलावर हुई CJP

CJI-NALSAR विवाद में बार काउंसिल का यू-टर्न, फैसले की वापसी के बाद मनन मिश्रा पर हमलावर हुई CJP
CJI-NALSAR विवाद (सांकेतिक Photo)

नई दिल्ली: NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध से जुड़ा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने छात्रों की जांच और उनके अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने संबंधी अपना पूर्व आदेश वापस ले लिया है। इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे युवाओं की जीत बताया है और अब बीसीआई अध्यक्ष तथा भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

CJP ने फैसले को बताया युवाओं की जीत

बीसीआई के फैसले की जानकारी सामने आने के बाद सीजेपी नेताओं ने इसे छात्रों के संघर्ष की सफलता बताया। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह युवाओं की एक बड़ी जीत है, हालांकि जवाबदेही की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

मनन मिश्रा के इस्तीफे की उठी मांग

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग का समय आ गया है। वहीं, पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मनन मिश्रा से जुड़े कई गंभीर आरोप और सवाल सामने आए हैं, जिनके मद्देनजर उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए और इसी उद्देश्य से उनकी पार्टी संघर्ष कर रही है।

राज्य बार काउंसिल अब कर सकेंगी नामांकन

बीसीआई के संशोधित आदेश के अनुसार, राज्य बार काउंसिल अब NALSAR के छात्रों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन कर सकती हैं। परिषद ने कहा है कि विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यकता पड़ने पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

हालांकि, परिषद ने अपने बयान में यह भी कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं, जबकि कुछ शिक्षकों और बाहरी व्यक्तियों ने CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध को बढ़ावा दिया था।

बीसीआई ने क्यों बदला फैसला?

बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एक्स पर बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार के सदस्यों, कानून के छात्रों और जागरूक नागरिकों से प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों की किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।

उन्होंने कहा कि इसी आधार पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पूरे मामले में चल रही कार्रवाई को समाप्त करने का निर्णय लिया है और अब छात्रों के खिलाफ किसी अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, NALSAR यूनिवर्सिटी के सैकड़ों छात्रों ने 2026 के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों का कहना था कि हाल के कुछ राष्ट्रीय मुद्दों और न्यायिक मामलों को लेकर उनकी चिंताएं हैं। विरोध के बाद बीसीआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया था। इस फैसले की व्यापक आलोचना हुई, जिसके बाद परिषद ने अपने आदेश की समीक्षा कर उसे वापस ले लिया।