जितेंद्र त्यागी के आरोपों पर शिया वक्फ बोर्ड का पलटवार, कहा- ‘आरोप निराधार और भ्रामक’
उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी के आरोपों का खंडन किया है. जितेंद्र त्यागी ने आरोप लगाया था कि लखनऊ मेरठ प्रयागराज अलीगढ़ और झांसी सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों की सम्पत्तियों को मुतवल्लियों ने बेच दिया है. उनके इस आरोपों को लेकर वक्फ बोर्ड ने अपना बयान जारी किया है.
बोर्ड ने पूर्व अध्यक्ष के सारे आरोपों को निराधार, भ्रामक और तथ्यहीन बताया है. बोर्ड का कहना है कि अगर जितेंद्र नारायण त्यागी के पास भ्रष्टाचार या किसी अन्य अनियमितता से जुड़े सबूत है तो उसे उसकी जांच एजेंसियों से करवा ले. बोर्ड ने कहा कि बिना प्रमाण सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाना लगत है.
वक्फ संपत्तियों को लेकर बोर्ड ने गिनाईं प्राथमिकताएं
बोर्ड ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का संरक्षण, अवैध कब्जों और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई उसकी प्राथमिकता है. बोर्ड के अनुसार सभी फैसले वक्फ अधिनियम, न्यायालयों के आदेश और संबंधित नियमों के तहत लिए जा रहे हैं.
किसी के दबाव में नियमों से समझौता नहीं होगा
बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा. साथ ही किसी के दबाव में नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा. वक्फ संपत्ति या बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर तथ्यात्मक शिकायत मिलने पर उसकी नियमानुसार जांच करवाई जाएगी.
मीडिया और जनता से की अपील
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपील की है कि बिना सत्यापन के आरोपों और बयानों पर भरोसा न करें. बोर्ड के मुताबिक, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और कानून के तहत काम करती है. नियमों को दरकिनार करके कोई काम नहीं किया जाएगा.
ये लगाया था आरोप
वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर करीब एक हजार करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए थे. शिकायत में अवैध रूप से कब्रों की बिक्री, हिंदुओं की संपत्तियों को वक्फ दर्ज करने और फर्जी वक्फ बढ़ाने के आरोप हैं. लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, अलीगढ़ और झांसी में बेशकीमती संपत्तियां कथित तौर पर बेचे जाने का भी आरोप है. दरगाहों के चंदे में गड़बड़ी समेत अन्य मामलों को लेकर मुख्यमंत्री से जांच की मांग की थी.
