सहारनपुर के कुमार सत्यम ने बढ़ाया देश का मान, डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस को मिला आईटीयू का वैश्विक सम्मान

सहारनपुर के कुमार सत्यम ने बढ़ाया देश का मान, डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस को मिला आईटीयू का वैश्विक सम्मान
  • सहारनपुर में डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस माॅडल के बारे में जानकारी देते कुमार सत्यम।

सहारनपुर। कुमार सत्यम के एआई आधारित डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस मॉडल को मंगलवार को भारतीय शोधकर्ता एवं उद्यमी कुमार सत्यम द्वारा विकसित डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस को अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के प्रतिष्ठित इनोवेट फॉर इंपैक्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट- 26 के दौरान प्रदान किया गया।

बता दें कि कुमार सत्यम सीईक्यूयू लैब्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। कुमार सत्यम ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पुरस्कार उन तकनीकों को दिया जाता है जो एआई के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की क्षमता रखती हैं। डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस को प्रशासन को अधिक तेज, पारदर्शी, डेटा आधारित और प्रभावी बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म सरकारों को बेहतर निर्णय लेने, जनसेवाओं में सुधार करने और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में मदद करता है। डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस पारंपरिक ई-गवर्नेंस प्रणाली से आगे बढ़कर एक आधुनिक इंटेलिजेंट गवर्नेंस प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है।

उन्होंने बताया कि यह सरकारी आदेशों, विभागीय सूचनाओं, नागरिक शिकायतों, जीआईएस डेटा, सीसीटीवी नेटवर्क, आईओटी सेंसर और आपातकालीन सेवाओं जैसी कई जानकारियों को एक मंच पर जोड़ता है। इससे अधिकारियों को वास्तविक समय में सटीक जानकारी मिलती है और वे तेजी से निर्णय ले सकते हैं। उन्होने बताया कि मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका आरएजी (रिट्राइवल-आॅगमेंटेड जनरेशन) आधारित दस्तावेज विश्लेषण इंजन है। यह केवल सामान्य एआई जानकारी पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि पहले संबंधित सरकारी आदेश, अधिसूचनाएं, परिपत्र, मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) और अन्य आधिकारिक दस्तावेज खोजता है। इसके बाद उन्हीं के आधार पर अधिकारियों को उत्तर और सुझाव देता है। इससे प्रशासनिक निर्णय अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और प्रमाणित बनते हैं। डिस्ट्रिक्ट एआई नेक्सस में एजेंटिक एआई, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी, जियोस्पेशियल एनालिटिक्स, सिक्योर एज कंप्यूटिंग, आईओटी इंटीग्रेशन और बहुभाषी एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। हालांकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह प्रशासनिक अधिकारियों के पास ही रहता है।