दिग्विजय सिंह बोले- ‘राम मंदिर चंदा चोरी से ध्यान भटकाने के लिए लाया गया सीएम का जमीन विवाद’

दिग्विजय सिंह बोले- ‘राम मंदिर चंदा चोरी से ध्यान भटकाने के लिए लाया गया सीएम का जमीन विवाद’

कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शुक्रवार (26 जून) को एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने देवास पहुंचे. देवास आगमन के दौरान उन्होंने स्थानीय सर्किट हाउस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन की गतिविधियों पर चर्चा की. मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की राजनीति में एक नया गरमागरम मुद्दा उछाल दिया. उन्होंने एक राष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर सीधा निशाना साधा.

एक अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कुर्सी संभालने के बाद से उनके परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों की जमीन चार गुना बढ़ी है. अब दिग्विजय सिंह का कहना है कि राम मंदिर के मामले से ध्यान भटकाने के लिए मोहन यादव से जुड़ा जमीन विवाद उठाया जा रहा है.

दिग्विजय सिंह ने मोहन यादव पर उठाए सवाल

मीडिय से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, “इंडियन एक्सप्रेस मोहन यादव की एक खबर आई है. प्रश्न यह उठता है कि क्या राम मंदिर घोटाले से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह मामला तो नहीं लाया गया है? दोनों गंभीर मुद्दे हैं, एक मुद्दा धार्मिक आस्था से जुड़ा है और जहां तक मोहन यादव का सवाल है, भारतीय जनता पार्टी सिर्फ एक ही बात कह रही है कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए कोई जमीन नहीं खरीदी, लेकिन लैंड यूज तो बदला है? लैंड यूज बदलने से ही जमीन की कीमत बढ़ती है.”

सिंह का दावा शिवराज सिंह चौहान के शासन में भी हुआ था बदलाव

सिंह ने आगे कहा, “मुझे याद है जब शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते हुए लैंड यूज चेंज करवा ली गई थी, तब हम लोगों ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद उसे यथावत रखा गया था. फिर उन्होंने मुख्यमंत्री बनते ही इस प्रकार का बदलाव करवा लिया जैसा वो चाहते थे. अगर जमीन उन्होंने नई नहीं खरीदी, लेकिन जो जमीन पुरानी खरीदी हुई थी, उसका लैंड यूज तो चेंज किया गया और फिर वहीं से उन्होंने सड़क निकाली. ”

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर जमीन के जादू और मास्टर प्लान के बदलावों को लेकर बहस छिड़ गई है. अब देखना यह है कि कांग्रेस के इन तीखे आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से क्या पलटवार आता है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने 23 जून को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि जब से मोहन यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं तब से लेकर अब तक मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी फर्मों की जमीन 4 गुना बढ़ गई है. रिपोर्ट के अनुसार, ‘मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने दिसंबर 2023 से दो साल के अंदर उज्जैन में ₹45 करोड़ में 168 एकड़ जमीन पर फैले कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं. इनमें से अधिकतर प्लॉट उन इलाकों में हैं जिन्हें उनकी सरकार द्वारा घोषित सड़क परियोजनाओं और जमीन के इस्तेमाल में बदलाव से फायदा हुआ है. रिकॉर्ड्स से यह भी पता चलता है कि इनमें से कम से कम छह प्लॉट बाद में बेच दिए गए थे.

किसके नाम हैं जमीनें?

रिपोर्ट में आगे बताया है कि जमीन के खतौनी (मालिकाना हक) रिकॉर्ड्स में ये प्लॉट मोहन यादव की पत्नी सीमा, बेटे वैभव की पत्नी शालिनी यादव, भाइयों नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाइयों गोविंद और नीलेश यादव ने खरीदे थे. इसमें ये भी दावा किया गया है कि या तो सीधे तौर पर या परिवार द्वारा चलाई जा रही चार रियल एस्टेट कंपनियों में से किसी एक के जरिए.

अब इस खबर के सामने आने के बाद से यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, बीजेपी ने मोहन यादव का बचाव किया है और अभी तक मोहन यादव की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस को अब मोहन यादव को घेरने का एक नया मुद्दा मिल गया है. अब सबकी निगाहें इस मामले की जांच पर हैंं, जिससे सच उजागर सामने आ सकेगा.

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