काम को पटरी पर लाने की चुनौती, बेंगलुरु लाए जाएंगे 20 हजार मजदूर

 

बेंगलुरु
कोरोना वायरस के चलते कमजोर होती अर्थव्यवस्था की चुनौती के बीच इंडस्ट्रीज और कामकाज को शुरू करना बेहद जरूरी हो गया है। इससे भी बड़ी चुनौती है अब इंडस्ट्रीज के लिए लेबर को ढूंढना…। क्योंकि ज्यादातर बाहरी मजदूर अपने-अपने घर जा चुके हैं। ऐसे में कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों से बेंगलुरु और अन्य औद्योगिक शहरों में मजदूरों को लाया जाएगा।

कर्नाटक सरकार ने उद्योगों की मांग की तरफ ध्यान देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रदेश में मजदूरों का आवागमन सुनिश्चित किया जाए। मजदूरों की वापसी के बाद उद्योगों को चलाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है।

उद्योग संघ का मानना है कि बेंगलुरु में करीब 20 हजार कामगारों की कमी है, जिन्हें स्पेशल बसों के जरिए शहर तक लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई फैक्ट्रियां मजदूरों और कामगारों की कमी के चलते बंद पड़ी हैं। कोरोना संक्रमण के खतरे के चलते ज्यादातर मजदूर अपने-अपने घर वापस जा चुके हैं और अब लॉकडाउन और तमाम पाबंदियों के चलते वापस नहीं आ सकते।

कंपनियां बसों के जरिए मजदूरों को खुद लाने को तैयार

कंपनियां मजदूरों की वापसी के कर्नाटक रोडवेज या प्राइवेट बसों के संचालन की अनुमति मांग रही हैं। उन्होंने कहा कि वे इनका सारा खर्च खुद उठा लेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मजदूरों को ले आएंगे।

सबसे ज्यादा किल्लत स्किल्ड लेबर की है

प्रदेश उद्योग संघ के अध्यक्ष सीआर जनार्दन ने कहा कि सबसे ज्यादा किल्लत स्किल्ड लेबर की है जिनके बिना हम काम नहीं कर सकते। जो उद्योग कामकाज शुरू करना चाहते हैं वे लेबरों की कमी के चलते ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में 20 हजार से ज्यादा मजदूर फंसे हुए हैं और उनको औद्योगिक शहरों तक वापस लाना बेहद जरूरी है।

 
 

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