सहकारिता से स्वावलंबन और संगठन मजबूती का संदेश
सहारनपुर। सहकार भारती की ओर से शनिवार को सहारनपुर में विभाग स्तरीय अभ्यास वर्ग आयोजित किया गया। इसमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के पदाधिकारियों, प्रकोष्ठ प्रमुखों एवं कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। अभ्यास वर्ग में सहकारिता के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन, संगठन विस्तार और समाज के सर्वांगीण विकास पर मंथन किया गया।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि मेयर डॉ. अजय सिंह, अतिविशिष्ट अतिथि गंगोह विधायक कीरत सिंह और सहकार भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष अभय चौधरी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीसीएफ चेयरमैन सोमेंद्र राणा ने की।
मुख्य वक्ता एवं सहकार भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता ने संगठन के मूल विचार, उद्देश्यों और विभिन्न प्रकोष्ठों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता, संस्कार और स्वावलंबन का माध्यम है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक लोगों को सहकारिता से जोड़ने का आह्वान किया।
प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने संगठनात्मक ढांचे और कार्यपद्धति पर चर्चा करते हुए कहा कि नियमित संपर्क, बैठक, प्रशिक्षण और समीक्षा के माध्यम से संगठन को ग्राम स्तर तक मजबूत किया जाना चाहिए। प्रदेश अक्षय ऊर्जा प्रमुख उमाकांत शर्मा ने आर्थिक स्वावलंबन और स्वावलंबी भारत अभियान पर विचार रखे।
प्रदेश उपाध्यक्ष अभय चौधरी ने सहकारिता आंदोलन में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को जरूरी बताया। वहीं प्रदेश आईटी सेल संयोजक संजय चौहान ने संगठन विस्तार और जनसंपर्क में डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
विभाग प्रमुख हिमांशु पुंडीर ने कहा कि सहकार भारती का उद्देश्य सहकारिता के विचार को गांव-गांव और व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने किसान, महिला, युवा, एफपीओ, मत्स्य, गन्ना और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को सहकारिता से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
इस दौरान जिलाध्यक्ष अंचल चौधरी, महामंत्री श्यामवीर सिंह, संगठन प्रमुख वीरेंद्र तोमर, मीडिया प्रभारी चरण सिंह, महिला प्रमुख सपना चौधरी और मत्स्य प्रकोष्ठ प्रमुख विपिन परमार ने भी संगठन विस्तार और क्षेत्रवार गतिविधियों पर अपने विचार रखे।
अभ्यास वर्ग में तीनों जिलों के बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन सहकारिता के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन और संगठन को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार” का संदेश दिया।
