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विकेट के पीछे रहते हुए स्ट्रैटिजी बनाने में माही का नहीं था कोई मुकाबला

 

नई दिल्ली
चैंपियन क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की कामयाबी मैदान पर अनायास नहीं है। अपनी कप्तानी में भारत की झोली में वर्ल्ड टी20, 50 ओवर वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रोफी जैसे खिताब भरने वाले धोनी को क्रिकेट पंडितों ने ‘कैप्टन कूल’ का नाम दिया। इसके लिए उनकी सोच-समझकर रणनीति बनाने और इंटरनैशनल क्रिकेट में जबर्दस्त प्रेशर के बीच भी विचलित ना होने का उनका अप्रोच जिम्मेदार था। यही कारण था एक युवा बल्लेबाज को जब 2007 में एकाएक कप्तानी थमाई गई तो उसने तुरंत आकर ‘चमत्कार’ कर दिखाया। यही नहीं, उनकी बल्लेबाजी में भी यही जज्बा दिखता था जोकि उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे शानदार ‘फिनिशर’ का दर्जा दिला गया।

सूझबूझ भरे फैसले से मैच का परिणाम बदल दिया
अपनी कप्तानी के दौरान ऐसे ढेरों मौके आए जब धोनी ने सूझबूझ भरे फैसले से मैच का परिणाम बदलने में कामयाबी पाई। उन्हें अपनी काबिलियत पर कितना भरोसा था इसका एक उदाहरण 2011 के वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में मिलता है जब कप्तान एमएस ने श्रीलंका के बड़े टारगेट के सामने बैटिंग के लिए इनफॉर्म बल्लेबाज युवराज सिंह का ना भेजकर खुद को प्रमोट किया और मैच विनिंग पारी खेलकर टीम को चैंपियन बना दिया।
2007 का वर्ल्ड कप तो याद होगा ही
उनके तेज दिमाग और तुरंत फैसले लेने की काबिलियत 2007 के टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज के मैच में पाकिस्तान के खिलाफ भी दिखी जहां स्कोर बराबर रहने पर उन्होंने बोल-आउट के लिए फास्ट बोलर्स के ऊपर हरभजन सिंह के अलावा रॉबिन उथप्पा और वीरेंद्र सहवाग जैसे पार्ट टाइम बोलर को उतारकर बाजी मारी।

विकेट के पीछे रहकर बनाते थे स्ट्रैटिजी
2014 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में धोनी का ईशांत शर्मा को बाउंसर और बॉडीलाइन गेंदबाजी के लिए कहना भी उनका मास्टरस्ट्रोक माना गया। ईशांत की लेंथ के आगे इंग्लिश बल्लेबाज असहाय नजर आए और उन्होंने पांच विकेट झटककर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। ऐसे तमाम उदाहरण हैं जहां विकेट के पीछे से धोनी की स्ट्रैटिजी टीम के लिए वरदान साबित हुई।

 
 

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