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UP के किसानों में जबरदस्त उबाल, मेरठ कलेक्ट्रेट कैंपस में ट्रैक्टर लेकर घुसे

 

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ कलेक्‍ट्रेट कैंपस में सोमवार को किसानों ने ‘किसान विरोधी अध्यादेशों’ के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं किसानों ने जबरन ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर कलेक्ट्रेट कैंपस में घुस गए। बड़ी संख्‍या में प्रदर्शन करने आए किसानों के सामने कलेक्‍ट्रेट पर तैनात पुलिस बल असहाय दिखाई दिया। जिसके बाद किसानों ने कलेक्‍ट्रेट परिसर में जमकर प्रदर्शन किया। इसी तरह यूपी के बागपत समेत अन्य जिलों में भी किसानों का प्रदर्शन जारी है।

किसानों ने कलेक्‍ट्रेट के अंदर तोड़ी कुर्सियां
बता दें कि किसान केंद्र सरकार के 3 प्रस्‍तावों का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने बेरोजगारी और अन्‍य कुछ मुद्दों पर भी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर कलेक्‍ट्रेट में जबरन घुसते समय किसानों ने गेट पर जोरदार टक्‍कर मारी। इस दौरान तैनात पुलिस कर्मियों ने किसानों को गेट पर रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहे। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कलेक्‍ट्रेट के अंदर कुर्सियां भी तोड़ डालीं। किसानों की बड़ी संख्‍या को देखते हुए कलेक्ट्रेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों के प्रदर्शन के बीच पहुंचे कुछ सपा नेताओं ने पार्टी का झंडा भी लहराया।

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किसान केंद्र सरकार के इन 3 अध्यादेश का कर रहे हैं विरोध
1.  मोदी सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया है, जिसके जरिये खाद्य पदार्थों की जमाखोरी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया. इसका मतलब है कि अब व्यापारी असीमित मात्रा में अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल प्याज और आलू को इकट्ठा करके रख सकते हैं।
2.  सरकार ने एक नया कानून- कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 पेश किया है, जिसका उद्देश्य कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी मंडियों) के बाहर भी कृषि उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है।
3.  केंद्र ने एक और नया कानून- मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020– पारित किया है, जो कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को कानूनी वैधता प्रदान करता है ताकि बड़े बिजनेस और कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर जमीन लेकर खेती कर सकें।

 
 

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