यूपी चुनाव 2027: INDIA गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगे चंद्रशेखर आजाद? सपा को लेकर दिया बड़ा बयान, गन्ने का रेट 600 रुपये करने की मांग
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं और चुनावी समीकरणों पर चर्चाओं के बीच नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि INDIA गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के सभी रास्ते अभी खुले हैं। उनकी कोशिश है कि आगामी चुनाव में विपक्षी वोटों का बंटवारा न हो और भाजपा के खिलाफ मजबूत राजनीतिक विकल्प तैयार किया जाए।
मुजफ्फरनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन, किसानों की समस्याओं, गन्ना मूल्य, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और चुनाव प्रक्रिया सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
एक महीने में साफ होगी गठबंधन की तस्वीर
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक माहौल को समझने के लिए एक महीने का समय मांगा है। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ दलितों, पिछड़ों, मुसलमानों, किसानों और मजदूरों के बीच राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन सभी वर्गों की एकजुटता बड़ी राजनीतिक ताकत बन सकती है। आजाद ने INDIA गठबंधन को लेकर कहा, “मैं तो इंडिया अलायंस के लोगों को भी कह रहा हूं कि मिल के लड़ते हैं। अगर कोई नहीं लड़ेगा तब देखेंगे, अभी तो अलायंस के सारे रास्ते खुले हुए हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव में वोटों का बंटवारा रोकना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही कहा कि वोटर किसी राजनीतिक दल की जेब में नहीं होता। जनता का विश्वास हासिल करने के लिए सभी को जमीन पर मेहनत करनी पड़ती है।
सपा से गठबंधन पर अखिलेश यादव को लेकर तीखी टिप्पणी
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में चंद्रशेखर आजाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी भाजपा को मिलकर हराने के बजाय अकेले चुनाव लड़ना पसंद करेगी।
आजाद ने कहा, “मुझे ऐसा लगता है कि वो हारना पसंद करेंगे, लेकिन मिल कर भाजपा को हराना पसंद नहीं करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि इसके पीछे क्या कारण है, इसका जवाब समाजवादी पार्टी के नेताओं से ही पूछा जाना चाहिए।
मीरापुर में एक लाख से ज्यादा वोट मिलने का दावा
मीरापुर विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए आजाद ने कहा कि पिछले उपचुनाव में वोटों का बंटवारा हुआ था। इसके बावजूद उनकी पार्टी को करीब 24 हजार वोट मिले।
उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होने पर यह आंकड़ा 50 हजार के पार पहुंच सकता है। वहीं, विपक्षी वोट एकजुट होने की स्थिति में उनकी पार्टी के प्रत्याशी रविंद्र भाटी एक लाख से अधिक वोट हासिल कर विधानसभा पहुंच सकते हैं।
चीनी 60 रुपये किलो तो गन्ना 600 रुपये क्विंटल क्यों नहीं?
किसानों के मुद्दे पर चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई।
उन्होंने सवाल किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने गन्ने के मूल्य में कितनी बढ़ोतरी की है। आजाद ने कहा, “जब चीनी का रेट ₹60 हो सकता है तो गन्ने का रेट ₹600 क्यों नहीं हो सकता? ऐसा क्या कारण है? कौन रोक रहा है?”
उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य क्यों नहीं मिल पा रहा है, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने, मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने, अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
चंद्रशेखर आजाद ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दे का जिक्र करते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होना बेहद जरूरी है। उनकी मांग है कि आगामी चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं।
आजाद ने कहा कि जनता की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि जनता बैलेट पेपर से चुनाव चाहती है तो उसकी मांग का सम्मान किया जाना चाहिए।
पंचायत चुनाव में देरी पर सरकार को घेरा
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर भी आजाद ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव कराने से बच रही है क्योंकि उसे जनता के विरोध का डर है।
उन्होंने दावा किया कि हाई कोर्ट के तीन महीने में चुनाव कराने संबंधी निर्देश के बावजूद सरकार सुप्रीम कोर्ट जाकर स्थगन आदेश लेने का प्रयास कर सकती है।
वहीं, एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर उन्होंने कहा कि इससे विपक्ष की वास्तविक राजनीतिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकेगा। उनके मुताबिक, इस बार विपक्ष अलग-अलग चुनाव लड़ा है और परिणाम बताएंगे कि कौन कितना मजबूत है।
2027 के लिए नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत
चंद्रशेखर आजाद के बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आजाद समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं को फिलहाल समाप्त नहीं करना चाहती। हालांकि, समाजवादी पार्टी को लेकर उनकी टिप्पणी विपक्षी एकजुटता की राह में मौजूद राजनीतिक मतभेदों को भी उजागर करती है।
अब देखना होगा कि अगले एक महीने में चंद्रशेखर आजाद क्या राजनीतिक फैसला लेते हैं और उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन की तस्वीर क्या बनती है।
