देसी कोरोना वैक्‍सीन का 50 लोगों पर ट्रायल पूरा, पीजीआई रोहतक के नतीजों ने जगाई उम्‍मीद

 

 

  • ICMR-भारत बायोटेक ने मिलकर बनाई है कोरोना वैक्‍सीन
  • Covaxin का देश में 12 जगहों पर चल रहा फेज 1 ट्रायल
  • रोहतक के पीजीआई में इंसानों पर ट्रायल का पहला पार्ट पूरा
  • अभी तक के नतीजे शानदार, आगे ट्रायल से जगीं उम्‍मीदें
  • जायडस कैडिला भी कर रही अपनी वैक्‍सीन का ट्रायल

रोहतक
भारत की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन Covaxin का ट्रायल तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। पीजीआई रोहतक में इंसानों पर इसके फेज 1 ट्रायल का पहला पार्ट पूरा हो चुका है। देशभर में 50 लोगों को इस वैक्‍सीन की पहली डोज दी जा चुकी है। शनिवार को पीजीआई रोहतक के साइंटिस्‍ट्स ने दूसरे दौर की प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्‍होंने छह और लोगों को वैक्‍सीन की डोज दी है। ट्रायल टीम में प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर डॉ सविता शर्मा ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि वैक्‍सीन ट्रायल के शुरुआती नतीजे बेहद ‘उत्‍साहवर्धक’ रहे हैं।

दिल्‍ली एम्‍स के सामने आई मुश्किल
Covaxin का सबसे बड़ा ट्रायल दिल्ली एम्स में चल रहा है। पहले चरण में संस्थान को 100 वॉलंटियर्स पर ट्रायल करना है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली एम्स के ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए करीब 3500 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से 50 प्रतिशत से ज्यादा दूसरे राज्यों के हैं। दिल्ली में रहने वाले ज्यादातर वॉलंटियर्स के शरीर में पहले से ही कोरोना के खिलाफ ऐंटीबॉडी मौजूद है। इसका मतलब है कि वे ट्रायल के लिए योग्य नहीं हैं। एम्‍स में शुक्रवार को एक शख्‍स को वैक्‍सीन की डोज दी गई थी। उसे किसी भी प्रकार का रिएक्शन नहीं हुआ और दो घंटे बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

वॉलंटियर्स को डायरी में लिखनी होगी हर परेशानी
डॉक्टर ने बताया कि वॉलंटियर्स को एक डायरी दी गई है, जिसे उन्हें मेंटेन करना है। अगर उन्हें कोई दिक्कत होती है तो उसके बारे में लिखना है। उन्होंने कहा कि वॉलंटियर को फॉलोअप के लिए सात दिन बाद फिर बुलाया जाएगा, लेकिन इस बीच में अगर उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत होती है, तो कभी भी आ सकते हैं। यही नहीं, वैक्सीन टीम के लोग फोन के जरिए उनके संपर्क में रहेंगे और रोज हालचाल लिया जाएगा। वैक्सीनेशन के बाद इसकी सेफ्टी की रिपोर्ट एथिक्स कमिटी को भेजी जाएगी। कमिटी के रिव्यू के बाद इस ट्रायल को आगे बढ़ाया जाएगा

15 जुलाई से शुरू हुआ था ट्रायल
भारत में बनी पहली कोरोना वैक्‍सीन Covaxin का फेज 1 ट्रायल 15 जुलाई 2020 से शुरू हुआ था। एम्‍स पटना वह पहला इंस्टीट्यूट था जहां इस वैक्‍सीन का फेज 1 ट्रायल सबसे पहले शुरू हुआ। Covaxin एक ‘इनऐक्टिवेटेड’ वैक्‍सीन है। यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्‍स से बनी है जिन्‍हें मार दिया गया था ताकि वे इन्फेक्‍ट न कर पाएं। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज बनती हैं।

जायडस कैडिला की वैक्‍सीन का ट्रायल भी जारी
Covaxin के अलावा जायडस कैडिला की ZyCoV-D को भी फेज 1 और फेज 2 ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मंजूरी मिल चुकी है। ट्रायल के पहले फेज में जायडस कैडिला 1,000 पार्टिसिपेंट्स को डोज देगी। डीएनए पर आधारित ZyCoV-D अहमदाबाद के वैक्‍सीन टेक्‍नोलॉजी सेंटर (VTC) में डेवलप की गई है। भारत की कम से कम सात कंपनियां- Bharat Biotech, Zydus Cadila, Serum Institute, Mynvax Panacea Biotec, Indian Immunologicals और Biological E कोरोना वायरस की वैक्‍सीन बनाने में जुटी हुई हैं।

 
 

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