भरत तिवारी एनकाउंटर में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के पास जाने को कहा

भरत तिवारी एनकाउंटर में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के पास जाने को कहा

भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह याचिका रविवार (21 जून, 2026) को सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने दाखिल की थी. उन्होंने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सीबीआई जांच, संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की थी.

वकील ने बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी. सोमवार (22 जून, 2025) को जस्टिस बी. वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने मेंशनिंग करने का निर्देश दिया है.

दायर याचिका में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग और मौके पर मौजूद अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. याचिका में सभी फुल और हाफ एनकाउंटर की जांच की मांग भी की गई हैं.

इस बीच बिहार सरकार ने भी मामले को लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बिलौटी गांव में हुई मुठभेड़ की जांच पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाएगी. सरकार का कहना है कि इस जांच से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ समीक्षा सुनिश्चित होगी.

उधर, इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई है. बिहार पुलिस ने एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई एक कथित वीडियो सामने आने के बाद की गई, जिसमें एक हथियारबंद व्यक्ति पुलिस बल की ओर पिस्तौल ताने हुए दिखाई दे रहा है और पुलिसकर्मियों पर समय पर प्रतिक्रिया न देने के आरोप लगाए गए हैं.

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