‘SIR में…’ प्रियांक खरगे का हमला! डीलिमिटेशन बिल पर भी भड़के

‘SIR में…’ प्रियांक खरगे का हमला! डीलिमिटेशन बिल पर भी भड़के

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया सभी लोगों को साथ लेकर चलने के बजाय कुछ नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर कर सकती है. खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग से पूछे गए उनके कई सवालों का अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है.

प्रियांक खरगे ने कहा कि SIR की प्रक्रिया में कई बातों की स्पष्ट परिभाषा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि इसमें लॉजिकल गड़बड़ियों और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया राजनीतिक दबाव में अपनाई जा रही है. खरगे ने डीलिमिटेशन कमीशन बिल को लेकर भी सवाल उठाया. उनके मुताबिक, इसका असर सिर्फ भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनसंख्या के आधार पर सीमाएं तय करने में भी इसका प्रभाव पड़ सकता है.

KPSC मामले में सरकार ने जांच का भरोसा दिया

कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन यानी KPSC से जुड़े कथित घोटाले पर भी प्रियांक खरगे ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने गृह विभाग को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है और राज्य सरकार जांच में हर संभव सहयोग कर रही है. उन्होंने कहा कि KPSC के चेयरमैन को लेकर सरकार का रुख साफ है. सरकार ने राज्यपाल को सलाह दी है कि चेयरमैन अपने पद पर न रहें और मामले की जांच कराने की मांग भी की गई है. खरगे ने कहा कि परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को न्याय दिलाने के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी.

नागेंद्र के इस्तीफे की मांग पर BJP को जवाब

BJP की ओर से नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन पर भी प्रियांक खरगे ने सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या नागेंद्र को किसी मामले में दोषी ठहराया गया है या उनका नाम CID अथवा SIT की जांच में शामिल है. खरगे ने कहा कि सरकार लगातार विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने BJP से विधानसभा में नोटिस देने और बहस करने को कहा है. उनका कहना है कि अगर विपक्ष के पास कोई दस्तावेज या ऐसा सबूत है, जो आरोपों को साबित करता है, तो सरकार उसका जवाब देने के लिए तैयार है.

क्या है SIR?

SIR मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है. इसके तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित जानकारी का दोबारा सत्यापन किया जाता है. इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ राज्यों में नागरिकों के अधिकार तथा दस्तावेजों की जरूरत जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं.

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