SIR पर सियासी संग्राम तेज, खरगे की 3 मांगों से नहीं होगा समझौता; CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष हमलावर
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ कहा है कि पार्टी अपनी तीन प्रमुख मांगों से समझौता नहीं करेगी।
खरगे के मुताबिक कांग्रेस की पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, दूसरी SIR प्रक्रिया को रद्द करना और तीसरी बैलेट पेपर से चुनाव कराना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के सहयोगी इन मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन कर रहे हैं।
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सिविल सोसाइटी के सदस्य और युवा संगठन भी इन मुद्दों को लेकर अलग-अलग जगहों पर संघर्ष कर रहे हैं और कांग्रेस उनके साथ खड़ी है।
महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी पर भी खरगे का हमला
मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे निंदनीय बताया और आरोप लगाया कि सरकार लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दों की ओर भटकाने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस की DCP नेहा यादव के अनुसार, नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 लागू होने के बावजूद 3 अक्टूबर को AISA और अन्य संगठनों ने SIR के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को धारा 163 के बारे में जानकारी देकर वहां से हटने के लिए कहा गया था। आरोप है कि निर्देश नहीं मानने पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के अनुसार, शाम करीब 6 बजे खुद को पत्रकार बताने वाली तीन महिलाओं ने हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा कथित बदसलूकी की शिकायत की। पुलिस ने बताया कि शिकायतें दर्ज की गईं, मेडिकल जांच कराई गई और मामले को क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया। पुलिस ने लोगों से घटना से संबंधित वीडियो फुटेज उपलब्ध कराने की अपील भी की है।
DMK ने भी CEC पर साधा निशाना
SIR को लेकर विपक्षी दलों के हमलों के बीच DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष नहीं हैं और उन पर राजनीतिक पक्षधरता के आरोप लगाए।
बीजेपी का पलटवार
विपक्ष के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जब विपक्ष चुनाव में हारता है तो वह EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष रामचंदर राव ने कहा कि किसी राज्य में जीत मिलने पर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया को सही बताता है, जबकि हार के बाद चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए जाते हैं।
NDA में शामिल JDU के बिहार अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक नाकामी छिपाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम हटाया गया है तो संबंधित जानकारी आयोग के सामने लाई जानी चाहिए।
फडणवीस ने बताया SIR को पुरानी प्रक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने SIR को लेकर कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उनके मुताबिक चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करता रहा है।
फडणवीस ने दावा किया कि 1950 के दशक से लेकर अलग-अलग वर्षों में मतदाता सूचियों के व्यापक पुनरीक्षण किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं के जुड़ने, मृत्यु, प्रवास और एक स्थान से दूसरे स्थान पर पंजीकरण जैसे कारणों से मतदाता सूची में लगातार बदलाव होता रहता है।
उनके अनुसार, मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समय-समय पर व्यापक सत्यापन जरूरी है। योग्य नागरिकों को सूची में शामिल करना और किसी योग्य मतदाता को बाहर न करना चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए।
दिल्ली-मुंबई में प्रदर्शन, कांग्रेस ने बुलाई बैठक
CEC और SIR के मुद्दे पर दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर विपक्षी दलों और संगठनों के प्रदर्शन जारी हैं। कांग्रेस ने भी आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि बैठक में चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया के दौरान कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर अपने हमले और तेज कर दिए हैं।
