लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में लागू हुआ पुलिस कमिश्नर सिस्टम

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट बैठक में लखनऊ और गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में पुलिस कमिश्नर प्रणाली का प्रस्ताव पास हो गया है। लोक भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर मुहर लग गई है। इसके साथ ही छह अन्य प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है।

कैबिनेट की बैठक के बाद आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मीडिया को संबोधित किया। इससे पहले कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह तथा श्रीकांत शर्मा मीडिया को कैबिनेट के फैसले की ब्रीफिंग करते थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की दृष्टि से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। हमारी सरकार ने बेहतर पुलिसिंग के लिए बड़ा तथा बढिय़ा कदम उठाया है। लम्बे समय से उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए इसकी मांग की जा रही थी। उसको पूरा किया गया है। आज के समय में लखनऊ में करीब 40 लाख तथा गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में करीब 25 लाख के आसपास की आबादी है। लखनऊ में अभी तक कुल 40 थाना हैं। अब लखनऊ में पुलिस आयुक्त प्रणाली होगी। जिसमे एडीजी रैंक के अफसर पुलिस कमिश्नर होंगे। प्रदेश मे आयुक्त प्रणाली मेट्रोपॉलिटन सिटी में लागू होगी। इसके साथ ही दोनों जगह पर महिला एसपी रैंक की अधिकारी को अलग से नियुक्ति दी जाएगी। जिससे महिलाओ की सुरक्षा के लिए अलग से काम हो सके। उनके साथ एएसपी रहंक की अधिकारी भी रहेंगी। लखनऊ तथा गौतमबुद्धनगर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए एसपी तथा एएसपी रैंक के अधिकारी तैनात होंगे। जिससे यातायात की व्यवस्था मजबूत हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने यूपी पुलिस में सुधार का सबसे बड़ा कदम उठाया है। पिछले 50 वर्ष में बेहतर पुलिसिंग के साथ ही साथ मजबूत कानून व्यवस्था के लिए इस प्रणाली की मांग हो रही थी। हमने लखनऊ तथा नोएडा में आयुक्त प्रणाली को लागू कर दिया है।

घाघरा का नाम बदलकर होगा ‘सरयू’

अवध और पूर्वांचल के कई जिलों से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी का नाम बदलकर ‘सरयू’ करने की तैयारी है नेपाल से होते हुए घाघरा भारत में ब्रह्मघाट पर शारदा से मिलती है और यहां से इसे घाघरा के नाम से जाना जाता है। यूपी सरकार केंद्र को नाम बदलने का प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है कैबिनेट में इसे मंजूरी मिल सकती है।

उन्नाव में बनेगा एक और थाना

उन्नाव में बनेगा एक और थाना। उन्नाव में कोतवाली सदर की दही चौकी को पुलिस थाने में बदलने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।

प्रयागराज में नई जिला जेल 

पुलिस विभाग के 63 जर्जर भवनों को ध्वस्त करने। प्रयागराज में बन रही नई जिला जेल की बढ़ी लागत पर सहमति हो सकती है।

सोनौली-बलिया स्टेट हाई-वे को चौड़ा करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है।

बड़ा होगा पुलिस के अधिकारों का दायरा

आइपीएस संवर्ग के अधिकारी चालीस से अधिक वर्ष से प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कराने की जो जंग लड़ रहे थे, वह आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। कानून-व्यवस्था के मोर्च पर अब पुलिस के पास भी प्रशासनिक अधिकारियों की तरह बड़े अधिकार होंगे। लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंप दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खास बैठक कर इसे लागू करने को लेकर लेकर गहन विचार विमर्श भी किया। पुलिस कमिश्नर को दिए जाने वाले अधिकारों को लेकर गहन मंथन चला। इसर कसरत के चलते ही लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में अब तक एसएसपी की तैनाती नहीं की गई है।

डीजीपी मुख्यालय ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने को लेकर जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसमें लखनऊ में एडीजी स्तर के अधिकारी को पुलिस आयुक्त बनाने की सिफारिश की गई है। पुलिस आयुक्त के नीचे आइजी स्तर के दो अधिकारियों को संयुक्त पुलिस आयुक्त, एसपी स्तर के नौ अधिकारियों को पुलिस उपायुक्त, एएसपी स्तर के नौ अधिकारियों को अपर पुलिस उपायुक्त व सीओ स्तर के 26 अधिकारियों को सहायक पुलिस आयुक्त के पदों पर तैनाती देने का प्रस्ताव है। इसी तरह से ही गौतमबुद्धनगर में आइजी अथवा उससे वरिष्ठ अधिकारी को पुलिस आयुक्त, उनके अधीन डीआइजी स्तर के दो अधिकारियों को अपर पुलिस आयुक्त, एसपी स्तर के छह अधिकारियों को पुलिस उपायुक्त, एएसपी स्तर के नौ अधिकारियों को अपर पुलिस उपायुक्त व सीओ स्तर के 15 अधिकारियों को सहायक पुलिस आयुक्त बनाए जाने का प्रस्ताव है। हर सर्किल में दो अथवा तीन थानों को ही रखा जाएगा। दोनों ही जिलों में पुलिस आयुक्त व संयुक्त पुलिस आयुक्त के नामों को लेकर भी चर्चा की जा रही है। इनमें बीते दिनों पदोन्नति पाकर एडीजी बने जयनारायण सिंह व एडीजी बने आलोक सिंह, आइजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार त्रिपाठी समेत कई अन्य अधिकारियों के नाम रेस में हैं।

डीजीपी ओपी सिंह ने संभावित नामों की एक सूची भी शासन को सौंपी है। माना जा रहा है कि शासन स्तर पर अंतिम निर्णय के बाद जल्द पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू किए जाने की घोषणा हो सकती है।

यह मिलेंगे अधिकार

कमिश्नर प्रणाली के तहत पुलिस को धारा 144 लागू करने, लोगों को पाबंद करने, शांतिभंग के तहत चालान में आरोपित को थाने से जमानत पर रिहा करने के अधिकार देने पर सहमति बनी है। पुलिस को एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून), गुंडा एक्ट व गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार भी मिलेगा। पुलिस कमिश्नर शस्त्र लाइसेंस जारी करने के अधिकारी भी होंगे। सूत्रों का कहना है सराय अधिनियम, आबकारी अधिनियम व चलचित्र अधिनियम के तहत पुलिस को अधिकार देने की सहमति नहीं बनी है। ऐसे ही कई अन्य अधिकारों को लेकर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

 
 
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