नैमिषारण्य: ‘आश्रम पर अवैध कब्जे का है प्लान’, परेशान साधुओं ने सीएम योगी से लगाई मदद की गुहार

 

 

  • सीतापुर के नैमिषारण्य में एक आश्रम में बीते 50-60 सालों से रह रहे महंतों एवं पुजारियों को दबंग कर रहे परेशान
  • साधुओं का आरोप, स्थानीय पुलिस की मदद से आश्रम पर कब्जे की योजना में हैं दबंग, कोर्ट में चल रहा है केस
  • नैमिष धाम के रामानुज कोट आश्रम में कई साधू और गरीब परिवार बीते कई दशकों से रह रहे हैं

लखनऊ/सीतापुर
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सीतापुर के धर्म क्षेत्र नैमिषारण्य में एक आश्रम में बीते 50-60 सालों से रह रहे महंतों एवं पुजारियों को दबंगों द्वारा वहां से निकालने की धमकी दी जा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि जमानी विवाद को लेकर कोर्ट में केस भी चल रहा है, बावजूद इसके स्थानीय पुलिस दबंगों का साथ देते हुए इन मजबूरों को सताने का कोई मौका नहीं छोड़ रही। दबंगों और पुलिस से प्रताड़ित पीड़ित कई बार मामले की शिकायत आला अधिकारियों से कर चुके हैं लेकिन अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के धर्मक्षेत्र कहे जाने वाले नैमिषारण्य में अधर्म का बोल बाला है। जिन्हें धर्म व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, वे ही अधर्म के पर्याय बन चुके हैं। अब इस धर्मक्षेत्र में साधुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है, उन्हें कभी दबंगों द्वारा घरों में बंद कर दिया जाता है तो कभी घर से निकाल दिया जाता है। आरोप है कि ये दबंग इस आश्रम पर कब्जा करना चाहते हैं। और पुलिस है कि इन साधुओं और इस आश्रम में रहने वाले अन्य गरीब लोगों की बात सुनने को ही तैयार नहीं है।

एसपी बोले- पुलिस का रोल नहीं, CO दे आए धमकी
आरोप है कि जब ये साधु शिकायत करने पुलिस के पास जाते हैं तो वहां इन्हें ही बैठा लिया जाता है। जिले के एसपी को पीड़ित साधु फोन करके शिकायत करते हैं तो वह मामले में कार्रवाई का आश्वासन देते हैं लेकिन जब मीडिया मामले में बारे में पूछता है तो एसपी कहते हैं कि मामला उनके संज्ञान में ही नहीं है, पीड़ित साधु फिर फोन करते हैं तो कहते हैं कि पुलिस कुछ नहीं कर सकती, एसडीएम के पास जाओ, लेकिन कुछ ही देर में सीओ साहब जाकर साधुओं को मंदिर खाली करने की धमकी दे आते हैं।

कोर्ट में केस, बाहर ही फैसला करने में जुटे दबंग
दरअसल में नैमिष धाम के रामानुज कोट आश्रम में कई साधू और गरीब परिवार बीते कई दशकों से रह रहे हैं। ये साधु भगवान की सेवा करते हैं और अपने परिवार को बेहतर जीवन देने की कोशिश में लगे हैं। आश्रम के गुरु श्रीराम प्रपन्नाचार्य ने 1989 में एक वसीयत लिखी, वसीयत में अपने शिष्यों को आश्रम चलाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी। लेकिन पड़ोस में एक स्कूल चलाने वाले की नियत डोली तो चलने लगा फर्जीवाड़े का खेल। मामले में विवाद बढ़ा तो बात कोर्ट तक पहुंची, केस आज भी कोर्ट में चल रहा है लेकिन स्थानीय दबंग देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर 50-60 सालों से आश्रम में रह रहे महंतों एवं उनके परिवारों को परेशान कर रहे हैं।

“तीसरी पीढ़ी आ गई, गुरुजी ने भगवान की सेवा को कहा था। हमारी बात होती तो छोड़कर चले जाते, कहीं भी मांग खा लेते लेकिन गुरू जी की अवज्ञा कैसे करें। अपने भगवान को छोड़कर कैसे जाएं। गुरूजी को वचन दिया था कि हमेशा भगवान की सेवा करेंगे। सब कष्ट, दुख सहकर अब तक करते आए, अब बहुत प्रताड़ित कर रही पुलिस, डीएम साहब भी नहीं सुनते”-महंत रामनिवासाचार्य

स्थानीय पुलिस की मिली-भगत से चल रहा खेल?
इस आश्रम में रहने वाले लोगों में साधु और पुजारियों के अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें एक वक्त पर इस आश्रम ने ही सहारा दिया था। वे सालों से यहां रह रहे थे। पर दबंगों को प्रशासन की शह के चलते किसी ने अपनी इज्जत बचाने के लिए खुद दर-बदर की ठोकरें खाना चुना तो किसी ने इनकी वजह से अपने पति को खो दिया। महंतों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस की मिली भगत से इस आश्रम से कई साधुओं को निकाला जा चुका है। आश्रम में दबंग कभी गंदगी फैलाकर इन्हें भगाने की कोशिश करते हैं तो कभी गेट पर ताला लगाकर उनके परिवारों को छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ कड़ी धूप में बिना दूध पानी के रहने पर मजबूर कर देते हैं।

सीएम योगी से लगाई गुहार
साधुओं का कहना है कि पुलिस के पास शिकायत लेकर जाते हैं तो वे हमें ही दोषी बताने लगते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम गरीब हैं, साधु के पास तो वैसे भी कुछ नहीं होता। कोर्ट में भी कहां से लड़ें। बस किसी तरह काम चल रहा है। कुछ गरीबों को यहां शरण मिली है। ये लोग जाने हैं कि हम इनका कुछ कर नहीं पाएंगे, इसीलिए हमें परेशान करके रखा है। पुलिस भी नहीं सुनती लेकिन योगीजी तो महंत हैं, वह तो परेशानी समझें, हम बेघर हो जाएं तो कोई बात नहीं, भगवान को कैसे छोड़ दें। गुरुजी ने जो काम सालों पहले सौंपा था, उसे कैसे छोड़ दें।’ मामले में सीतापुर के जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी से बात करने की कई बार कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

 
 
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