निर्मला सीतारमण के ऐलान में आज शाम मिडिल क्लास को मिलेगा बंपर तोहफा!

 
नई दिल्ली
कोरोना वायरस (Coronavirus in india) की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है। लॉकडाउन का पहला और दूसरा चरण खत्म हो चुका है और फिलहाल लॉकडाउन 3.0 (lockdown 3.0) चल रहा है, जो 17 मई को खत्म होने वाला है। इसी बीच पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए कुछ खास बातें कही हैं। एक तो लॉकडाउन 4.0 का जिक्र हुआ, दूसरा 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में उन्होंने श्रमिक-किसान से लेकर नौकरीपेशा और एमएसएमई तक का ख्याल रखा है। इसमें सबसे अहम हैं नौकरीपेशा, जो ईमानदारी से टैक्स देते हैं, जिसका जिक्र खुद पीएम मोदी ने भी किया था।

मिडिल क्लास को कभी नहीं भूलते मोदी

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पीएम मोदी ने देश के ना अपने संबोधन में कहा था कि ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग (नौकरीपेशा) के लिए भी है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है। बजट से लेकर चुनाव तक, कोई भी ऐसा मौका नहीं होता जब मिडिल क्लास की बात ना हो। इस बार भी वह मिडिल क्लास को नहीं भूले हैं और 20 लाख करोड़ के पैकेज में उन्हें भी जगह दी है।

क्या मिल सकता है मिडिल क्लास को?

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मिडिल क्लास को इस बार 20 लाख करोड़ के पैकेज के तहत टैक्स में छूट मिल सकती है। ऐसे कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं, क्योंकि पीएम मोदी ने सीधे-सीधे टैक्स पेयर्स की बात की है, ना कि पूरे मिडिल क्लास की। तो टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए सरकार का सबसे बड़ा हथियार तो टैक्स छूट ही होता है। वैसे भी कोरोना की वजह से पहले ही लोगों की सैलरी कट रही हैं और लोग नौकरी खो रहे हैं, ऐसे में यही एक तरीका है उनकी जेब में कुछ पैसे बचाने का, जिसकी घोषणा निर्मला सीतारमण कर सकती हैं।

काटी जा रही सबकी सैलरी

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अभी हालात ये हैं कि सभी की सैलरी कट रही है, चाहे वह निजी कंपनी में नौकरी करता है या फिर सरकारी कंपनी में। सरकारी कंपनी में तो कटौती काफी कम है और सरकारी नौकरी वाले लोग भी महज 1.5 से 2 फीसदी हैं। उनकी तुलना में निजी कंपनियों में काम करने वालों की संख्या बहुत अधिक है, जहां पर 25-30 फीसदी तक की सैलरी कटौती भी हो रही है। इंक्रिमेंट रोक दिया गया है। बहुत से लोगों को बिना सैलरी के छुट्टी यानी लीव विदआउट पे पर भेज दिया गया है। कहीं-कहीं हालात और भी खराब हैं, जहां लोगों को नौकरी से ही निकाल दिया गया है।

12.2 करोड़ लोगों की नौकरी गई

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पहले ही भारत में बेरोजगारी काफी थी और कोरोना ने हालात बद से बदतर बना दिए। सिर्फ अप्रैल के महीने में ही कोरोना की वजह से करीब 12.2 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी। बेशक इसमें से बहुत सारे लोग ऐसे होंगे, जो टैक्स के दायरे से बाहर होंगे, लेकिन एक बड़ी आबादी टैक्स वाली भी होगी। उन पर पहले ही नौकरी जाने की मार पड़ चुकी है, तो टैक्स छूट का मरहम की एक विकल्प दिखता है। ये भी कहा जा रहा है कि एमएसएमई के कर्मचारियों को स्टेट इंश्योरेंस फंड से सैलरी दी जा सकती है।

 
 

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