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असम नागरिकता मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी जमीयत: मदनी

 
मौलाना अरशद मदनी
  • असम नागरिकता मुद्दे पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि असम में सांप्रदायिक ताकतें विफल हो गई थीं। यही कारण है कि वे अब जानबूझकर राज्य में एक बार फिर से भय का माहौल बनाकर सांप्रदायिक संरेखण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

देवबंद:रविवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पूरी एनआरसी प्रक्रिया के दौरान इन ताकतों ने विभिन्न तरीकों से बाधा डालने की कोशिश की। लेकिन हर मौके पर जमीयत उलमा-ए-हिंद ने उनके इरादे को सफल नहीं होने दिया और अब नए राज्य समन्वयक एक नई कहानी लेकर आएं हैं। जिसको लेकर जमीयत पूरी तत्परता के साथ सुप्रीम कोर्ट जा रही है। मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत पहले नए समन्वयक की नियुक्ति को चुनौती देने के लिए अदालत में मामला उठाएगी, जो विगत जनवरी माह से लंबित है।

कहा कि एनआरसी के बारे में सब कुछ दूध की तरह साफ हो गया है। ऐसे मामले में इस तरह की नई रणनीति अपनाने से पता चलता है कि उनके इरादों में खामियां हैं और इस तरह की अधिसूचना केवल एक विशेष योजना के तहत जारी की गई है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि प्रथम दृष्टिया यह आदेश समय≤ पर सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश का स्पष्ट उल्लंघन है। स्पष्ट किया कि हमारी जानकारी के अनुसार लगभग १.९ मिलियन लोग एनआरसी से बाहर रह गए हैं। उनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो असम के वास्तविक नागरिक हैं। उनके पास सभी दस्तावेज हैं, लेकिन फिर भी उनका नाम एनआरसी में नहीं है। ऐसे में राज्य समन्वयक को कानूनी प्रक्रिया तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए थी। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने का मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा करने के बजाय, नए राज्य समन्वयक एनआरसी से नामित लोगों को निष्कासित करने के उपाय करने जा रहे हैं। जो पहले ही एनआरसी में शामिल हो चुके हैं। कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद ऐसा नहीं होने देगी और इसके लिए मजबूती से लड़ाई लड़ेगी।

 
 
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