प्रयागराज। उमेश पाल हत्याकांड में अतीक और अशरफ ने पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां दीं थीं। आशंका है कि सफेदपोशों सहित कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते थे, मगर इससे पहले ही दोनों की हत्या कर दी गई। कहा जा रहा है कि अगर पुलिस और ईडी की टीम के सामने अतीक सही ढंग से बयान दे देता तो तमाम नामी बिल्डर, कारोबारी, सफेदपोश, अपराधियों के चेहरे से पर्दा उठ सकता था।
- अतीक और अशरफ को गोलियों से छलनी करने वाले तीन शूटरों ने पुलिस कस्टडी में माफिया को मारने की दुस्साहसिक हरकत कैसे की?
- किसने उन तीनों को हत्या करने के लिए भेजा?
- इस बड़ी साजिश के पीछे असली चेहरा कौन है?
- क्या था कत्ल कराने के पीछे का इरादा?
इन सवालों के जवाब पुलिस अधिकारी भी नहीं दे रहे हैं, जबकि वे शूटरों से पूछताछ कर चुके हैं। अभी बहुत से सवालों के जवाब बाकी हैं। किसने इन तीन अपराधियों को तुर्किए निर्मित दो पिस्टल मुहैया कराई? तुर्किए में बनी एक पिस्टल की कीमत सात लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है। ऐसे में वहां की दो पिस्टल तकरीबन 15 लाख रुपये की हुई, जबकि पकड़े गए तीनों शूटरों की हैसियत न तो इस विदेशी पिस्टल को खरीदने की है और न उसे तस्करी के जरिए मंगाने की।
ऐसे में यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि पिस्टल मंगाकर देने और इस हत्याकांड की साजिश रचने के पीछे बड़ा दिमाग है। टारगेट भी कोई साधारण नहीं माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ थे। ऐसे में ये तीनों खुद अपने स्तर से ऐसे कांड की साजिश नहीं रच सकते थे। अतीक और अशरफ पर हमले का तरीका बता रहा है कि शूटरों को सब कुछ पता था। उन्हें मालूम था कि अतीक और अशरफ को 10 बजे के बाद काल्विन अस्पताल लाया जाएगा। आखिर कैसे उन्हें इतनी सटीक जानकारी थी?
कारोबारियों से चुनाव टैक्स भी उगाहता था अतीक
अतीक अहमद ने चार दशक के माफियाराज में गुंडागर्दी के बूते अरबों रुपये का साम्राज्य बनाया। रंगदारी वसूली से इतर उसने राजनीति में आने पर एक और उगाही शुरू की थी, जिसे उसने चुनाव टैक्स नाम दिया था। पुराने कारोबारी बताते हैं कि अतीक अहमद चुनाव में उतरने से दो-तीन महीने पहले से व्यापारियों, बिल्डर, प्रापर्टी डीलर आदि को चुनाव टैक्स की पर्ची भेजने लगता था।
गुलाबी पर्ची आई तो तीन से पांच लाख रुपये तक देना होगा और सफेद पर्ची मिली तो पांच लाख रुपये से ज्यादा धन टैक्स के रूप में देना होगा। चुनाव टैक्स की रकम अतीक अहमद के बैंक आफ महाराष्ट्र के खाते में जमा करा ली जाती थी। बिल्डर और उद्योगपति तो चुपचाप 10 से 20 लाख रुपये नकद बैग में भरकर पहुंचा देते थे।
सुप्रीम कोर्ट में 24 अप्रैल को सुनवाई
माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या की स्वतंत्र जांच की मांग संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 24 अप्रैल को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। धान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता विशाल तिवारी की दलीलों पर संज्ञान लिया जिन्होंने तत्काल सुनवाई के लिए मामले का उल्लेख किया था।
याचिका के मुताबिक वर्ष 2017 से उत्तर प्रदेश में हुईं 183 मुठभेड़ों की जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन के लिए दिशानिर्देश/निर्देश जारी किए जाएं ताकि कानून के शासन की रक्षा की जा सके।’
याचिका में अतीक की हत्या का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पुलिस की ऐसी कार्रवाइयां लोकतंत्र व कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा हैं और राज्य पुलिस शासन में तब्दील हो जाएगा। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के छह वर्षों में 183 कथित अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है।
