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क्या सच में लौट आया है विकास दुबे? शाम ढलते ही बिकरू गांव में पसर जाता है सन्‍नाटा

 

कानपुरः देश में खलबली मचा देने वाले कानपुर के बिकरू कांड ने एक बार फिर दहशत मचा दी है,बिकरू गांव में आज भी गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती है और तो और बिकरू कांड के दुर्दान्त विकास दुबे का भूत भी देख लिया गया है। जिसको लेकर रात के 9 बजते ही पूरे गांव में घरों के गेट बंद हो जाते हैं। किसी की हिम्मत नहीं कि कोई भी ग्रामीण बाहर तक झांक सके। क्योंकि विकास दुबे का भूत अपने घर की चाहर दिवारी के आस पास घूमता दिखाई देता है और गांववालों से घर के अंदर जाने को कहता है।
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 …जब गौर से देखा गया तो वह विकास दुबे था
सीओ समेत 8 पुलिसवालों को मौत के घाट उतारने वाला विकास दुबे बिकरू कांड के बाद से घर से फरार था, जिसके बाद विकास दुबे दुबारा अपने गांव बिकरू लौट ही नहीं पाया। क्योंकि बिकरू कांड के दुर्दान्त विकास दुबे को एसटीएफ ने एक दुर्घटना के बाद हुई मुठभेड़ में मार गिराया था। अब गांव में कोई भी ग्रामीण उसे पंडित जी के नाम से नहीं बुलाता है। जिसके बाद विकास दुबे का साम्राज्य खत्म हो चुका था, लेकिन 15 सितंबर के रात 12 बजे यहां के ग्रामीणों को रात के अंधेरे में कुछ दिखने लगा, जिसको गौर से देखा गया तो वह विकास दुबे था। जिसे देख कुछ ग्रामीण घरों के अंदर दुबक गए तो कुछ यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि जब विकास दुबे मर चुका है तो वह कौन था।
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12 बजे उसी महलनुमा खंडहर में विकास दुबे टहलता हुआ दिखा
वहीं एक दिन बीत गया दूसरे दिन फिर से रात के 12 बजे उसी महलनुमा खंडहर में विकास दुबे टहलता हुआ दिखा, जिसे देख ग्रामीण समझ गए कि मरा हुआ विकास दुबे अब जिंदा हो गया है, लेकिन भूत के रूप में जिसको देख गांव मे लगे पुलिस कर्मचारियों ने भी अपनी ड्यूटी हटवा ली है, क्योंकि विकास दुबे के भूत को देखने वाले 8 पुलिस वालों की तबियत जो बिगड़ चुकी थी। अभी तो दहशत सिर्फ विकास दुबे के भूत की थी।

8 पुलिसवालों की आवाजें भी देती है सुनाई
इतना ही नहीं 16 सितंबर की रात बिकरू गांव में जो वाक्या हुआ उसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने अभी तक विकास दुबे का भूत तो देखा ही था, लेकिन बीती रात को उन्हें उन 8 पुलिसवालों की आवाजें भी सुनाई दे रहीं थी, जो विकास दुबे की गोलियों से बचने के लिए बचाओ बचाओ की गुहार लगा रहे थे। साथ ही गोलियों की आवाजें भी उसी तरह सुनी जा रहीं थी जैसे 2 बजे 3 जुलाई की रात को सुनाई दी थी।

इस कहानी में कितनी सच्चाई है कितनी अफवाह है या फिर यूं कहें कि बिकरू कांड की दहशत अभी लोग भुला नहीं सके हैं, बिकरु का विकास दुबे यानी पंडित जी और उसके भूत को जहन से निकालने के लिए शायद पीढ़ियों की कहानी बन सकती है।

 
 

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