विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन के साथ संपर्क में भारत: विदेश मंत्रालय

 

नई दिल्ली
भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन की सरकार के साथ भारत संपर्क बनाए हुए है। नई दिल्ली द्वारा ब्रिटेन से माल्या के प्रत्यर्पण का अनुरोध के खिलाफ शराब कारोबारी सारे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को कहा, ‘भारत सरकार उसकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया के अगले चरण के लिए ब्रिटेन के साथ संपर्क बनाए हुए है।’

उन्होंने माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में ऑनलाइन मीडिया वार्ता में यह बात कही। ब्रिटेन की शीर्ष अदालत के निर्णय से 64 वर्षीय इस कारोबारी को झटका लगा है क्योंकि इससे कुछ हफ्तों पहले अप्रैल में उच्च न्यायालय ने भी उसकी अपील को खारिज कर दिया था। माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में है। स्कॉटलैंड यार्ड ने 18 अप्रैल 2018 को उसके खिलाफ प्रत्यर्पण वारंट जारी किया था और तभी से वह जमानत पर चल रहा है।

कुछ दिन पहले ही भारतीय शराब कारोबारी विजय माल्या को उस समय बड़ा झटका लगा जब ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील की अनुमति मांगने वाला माल्या का आवेदन नामंजूर हो गया। उसके बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया 28 दिन के अंदर पूरी करना तय हो गया। माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइन्स के कर्ज से संबंधित धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में भारत प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ उसकी अपील हाई कोर्ट में पिछले महीने ही खारिज हो गई थी।

माल्या (64) के पास हाई कोर्ट के फैसले के बाद से इससे भी ऊंची अदालत में जाने की अनुमति मांगने का ताजा आवेदन दाखिल करने के लिए 20 अप्रैल से लेकर 14 दिन का समय था। हाई कोर्ट ने ब्रिटेन के गृह मंत्री द्वारा प्रमाणित वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत के प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ माल्या की अपील खारिज कर दी थी। ताजा फैसले को ‘प्रनाउन्समेंट’ (घोषणा) कहा गया है यानी भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत ब्रिटेन का गृह कार्यालय अब माल्या को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के अदालत के आदेश को 28 दिन के भीतर औपचारिक रूप से प्रमाणित कर सकता है।

फैसले से पहले माल्या ने भारत सरकार द्वारा उस पर बकाया देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पैसा लेने की अपील दोहराई। माल्या ने कहा, ‘बिना शर्त मेरा धन ले लीजिए और मामले को बंद कीजिए।’ सैद्धांतिक रूप से अगले कदम के तौर पर माल्या अपने प्रत्यर्पण को इस आधार पर रोकने के लिए यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ईसीएचआर) में आवेदन कर सकता है कि उसे निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा और उसे हिरासत में लिया जाएगा जो यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स के अनुच्छेद 3 की शर्तों का उल्लंघन होगा। इस समझौते में ब्रिटेन भी एक पक्ष है।

अगर ईसीएचआर में इस तरह का आवेदन किया जाता है तो उसका फैसला आने तक प्रत्यर्पण की प्रक्रिया रुक जाएगी। हालांकि, ईसीएचआर में अपील के बाद भी माल्या के लिए सफलता की बहुत कम गुंजाइश होगी क्योंकि उसे साबित करना होगा कि इन आधारों पर ब्रिटेन की अदालतों में उसकी दलीलें पहले खारिज हो चुकी हैं। इस लिहाज से पिछले महीने हाई कोर्ट में माल्या की अपील खारिज होना और इस सप्ताह अपील दाखिल करने की अर्जी को एक बार फिर अस्वीकृत किया जाना शराब कारोबारी के खिलाफ मामले में सीबीआई तथा ईडी के लिए निर्णायक बिंदु हैं।

 
 

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