‘ऐसे लोगों का एनकाउंटर…’ मौलाना जर्जिस के ‘राम मंदिर’ वाले बयान पर भड़के महामंडलेश्वर बालकदास का पलटवार
मुरादाबाद। प्रीत विहार में हिंदू सम्मेलन समिति की ओर से आयोजित सम्मेलन में पहुंचे श्री राम दल के अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर बालकदास महाराज ने इटावा के मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान पर पलटवार किया है।
महामंडलेश्वर बालकदास ने कहा कि मौलाना जर्जिस अंसारी द्वारा राम मंदिर को बाबरी मस्जिद बताने और उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को पश्चिम बंगाल जाकर बसने की सलाह देना समाज में वैमनस्य फैलाने वाला बयान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान देश को बांटने की मानसिकता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति सुरक्षित है, लेकिन देश विरोधी बातें करने वालों को यहां रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का एनकाउंटर कर देना चाहिए।
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करती तो कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पड़ेगी। सम्मेलन के दौरान उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई इतनी बड़ी संख्या में मुसलमानों को बंगाल भेज सकता है और वहां उनके रहने की पर्याप्त व्यवस्था संभव है।
राम मंदिर के इतिहास को लेकर रखे अपने तर्क
राम मंदिर के विषय पर बोलते हुए बालकदास ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर हजारों वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है। उनके अनुसार इतिहास में महाराजा विक्रमादित्य द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था और बाबर का उस समय कोई अस्तित्व नहीं था। उन्होंने दावा किया कि बाबर ने बाद में मंदिर को तोड़कर ढांचा खड़ा किया, जिसे बाबरी कहा गया।
महामंडलेश्वर ने कहा कि बाबर भारत की पैदाइश नहीं था, बल्कि एक बाहरी आक्रमणकारी था। उन्होंने कहा कि मंदिर में पूजा करने वाले संत हरिदास को जहर देने जैसी घटनाओं का उल्लेख भी इतिहास में मिलता है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर पहले भी था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके अनुसार वहां बाबरी मस्जिद कभी नहीं थी, बल्कि मंदिर के ढांचे को बदलकर उसे बाबरी स्वरूप दिया गया था।
गो-हत्या, लव जिहाद और फिल्मों पर भी रखी राय
महामंडलेश्वर ने गो-हत्या के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गो-हत्या में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आती रही है।
लव जिहाद के विषय पर उन्होंने कहा कि समाज को जागरूक रहने की जरूरत है और धार्मिक व सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। वहीं, फिल्मों के विषय पर उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों का निर्माण होना चाहिए जो समाज को जागरूक करें और वास्तविक घटनाओं को सामने लाएं।
उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसी फिल्मों से समाज को वास्तविक घटनाओं की जानकारी मिलती है।
