बांग्लादेश चुनाव रिजल्ट: तारिक रहमान की बीएनपी को स्पष्ट बहुमत, जमात के हाथ लगी निराशा

बांग्लादेश चुनाव रिजल्ट: तारिक रहमान की बीएनपी को स्पष्ट बहुमत, जमात के हाथ लगी निराशा

नई दिल्ली। बांग्लादेश में गुरुवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक स्थानीय टीवी के हवाले से कहा कि बीएनपी ने 300 सदस्यों वाली संसद में 151 सीटें जीत ली हैं जबकि कई अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। बीएनपी के अध्यक्ष और पीएम पद के प्रत्याशी पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान दोनों सीटों से चुनाव जीत गए हैं।

उधर पीटीआई के अनुसार, बांग्लादेश में सत्ता की दौड़ में बीएनपी बंपर जीत की ओर अग्रसर है। 299 सीटों के लिए हुए चुनाव में उसके प्रत्याशी 175 से अधिक सीटों पर आगे चल रहे हैं।

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के लिए यह पहला बड़ा चुनाव है। 42,779 केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया सुबह साढ़े सात बजे से शाम साढ़े चार बजे तक चली।

तारिक रहमान दो सीटों पर जीते

50 राजनीतिक दलों के 1755 और 273 निर्दलीय उम्मीदवार इस चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीएनपी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की है। रहमान पीएम पद के उम्मीदवार भी हैं।

जमात-ए-इस्लामी के अध्यक्ष शफीकुर रहमान राजधानी से एक सीट पर आगे चल रहे हैं, जबकि जमात के महासचिव मिया गोलाम पोर्वार को दक्षिण-पश्चिमी खुलना निर्वाचन क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वी बीएनपी के अली असगर लाबी से हार का सामना करना पड़ा।

शुक्रवार सुबह तक सभी नतीजे आने की संभावना

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार सुबह तक सभी नतीजे आने की संभावना है। उधर, पीटीआई के अनुसार गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव और एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जनमत संग्रह के लिए मतदान होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती भी शुरू हो गई। चुनाव अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रारंभिक परिणामों में बीएनपी बड़े बहुमत की ओर अग्रसर है।

175 से अधिक सीटों पर बीएनपी आगे

299 सीटों के लिए हुए चुनाव में उसके प्रत्याशी 175 से अधिक सीटों पर आगे चल रहे हैं, जबकि पूर्व में सहयोगी रही और अब उसकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार महज 30 स्थानों पर आगे हैं। एक निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव रद कर दिया गया।

इस बीच, रॉयटर के अनुसार, बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य अमीर खासरू महमूद चौधरी ने कहा- ” दो-तिहाई सीटें जीतना बंपर जीत कहलाती है, मुझे लगता है कि हम 200 सीटों की सीमा पार करेंगे।” वैसे यह बांग्लादेश का कई दशकों में पहला ऐसा चुनाव है जिसमें कोई प्रमुख महिला नेता नहीं है।

अपदस्थ पीएम शेख हसीना जहां चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित हैं तो उनकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी पूर्व पीएम खालिदा जिया का 30 दिसंबर को एक लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। ये दोनों महिलाएं लगभग चार दशकों तक देश की राजनीति पर हावी रहीं।

मतदान का प्रतिशत और मतदाताओं की भागीदारी

निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद के अनुसार, दोपहर दो बजे तक मतदान 47.91 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस ऐतिहासिक चुनाव में लगभग 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं ने हिस्सा लिया। उल्लेखनीय है कि इस बार चुनाव के साथ-साथ एक 84-सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया है, जो देश के भविष्य की संवैधानिक दिशा तय करेगा।

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के कारण मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच है। देश के कई हिस्सों से हिंसा की घटनाओं की खबर चुनाव के दौरान देश के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें भी सामने आईं।

गोपालगंज में एक मतदान केंद्र पर बम हमले में 13 वर्षीय लड़की सहित तीन लोग घायल हो गए। वहीं, खुलना में जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में बीएनपी के एक स्थानीय नेता की मौत हो गई। मुंशीगंज में भी बम धमाकों के कारण कुछ समय के लिए मतदान बाधित हुआ।

30 वर्षों में पहली बार मतपत्र पर अवामी लीग का ‘नाव’ चिह्न नहीं

बांग्लादेश में 30 वर्षों में पहली बार अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग का चुनाव चिन्ह ‘नाव’ मतपत्र पर नहीं है। अगस्त 2024 में व्यापक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद यह पहला चुनाव है। अंतरिम सरकार ने पिछले वर्ष 12 मई को अवामी लीग की सभी पार्टी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसके तुरंत बाद, चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण निलंबित कर दिया था।

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियों में से एक, अवामी लीग ने अतीत में दो बार संसदीय चुनावों का बहिष्कार किया है। हालांकि, इस बार यह बिल्कुल भी भाग लेने में असमर्थ है, क्योंकि इसका पंजीकरण अभी भी निलंबित है।

अपना-अपना राग

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा, “अवामी लीग की भागीदारी के बिना कराया गया चुनाव फर्जी है। यह अवैध और असंवैधानिक तरीके से सत्ता हथियाने वाले हत्यारे-फासीवादी मुहम्मद यूनुस द्वारा रचा गया सुनियोजित तमाशा है।

11 फरवरी की शाम से ही मतदान केंद्रों पर कब्जा, गोलीबारी, वोट खरीदना, पैसे का वितरण, मतपत्रों पर मुहर लगाना और एजेंटों द्वारा परिणाम पुस्तिकाओं पर हस्ताक्षर करने के साथ यह तमाशा शुरू हो गया। देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करने की आवश्यकता है।”

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार, मुहम्मद यूनुस ने कहा, “यह चुनाव राष्ट्रीय गौरव और नवजीवन का क्षण है। आज नए बांग्लादेश का जन्मदिन है। जनता ने अतीत को नकार दिया है। अतीत चाहे जितना भी भयावह रहा हो, हमने उसे पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया है। आज से हमें एक नए बांग्लादेश के निर्माण का अवसर मिला है।”

तारिक रहमान, बीएनपी अध्यक्ष ने कहा, “बांग्लादेश के लोग एक दशक से अधिक समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। अगर हम सरकार बनाते हैं, तो हम देश में कानून व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता देंगे ताकि लोग सुरक्षित महसूस करें। आज से देश में लोकतंत्र की शुरुआत हो सकती है।”

शफीकुर रहमान, जमात-ए-इस्लामी अध्यक्ष ने कहा “हम निष्पक्ष प्रक्रिया से आने वाले परिणाम चाहते हैं। यदि मतदान स्वतंत्र और निष्पक्ष है, तो हम परिणाम स्वीकार करेंगे। दूसरों को भी इसे स्वीकार करना होगा। यही लोकतंत्र की सुंदरता है। हम यही चाहते हैं।”


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