शोभित विश्वविद्यालय गंगोह में हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन
गंगोह [24CN] : दिनाँक 14-09-2026 को विरासत यूनिवर्सिटी हेरिटेज रिसर्च सेंटर एवं स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड लैंग्वेजेज के संयुक्त तत्वावधान में शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह में हिन्दी दिवस के अवसर पर काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनपद सहारनपुर के प्रतिष्ठित कवियों ने काव्य-पाठ कर श्रोताओं को आनंदित किया।
शोभित विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित काव्य-गोष्ठी का कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महीपाल सिंह, केयर टेकर सूफी जहीर अख्तर, प्रो.(डॉ.) गुंजन अग्रवाल, डॉ. राजीव उपाध्याय ‘यायावर एवं आगंतुक अतिथिगण ने दीप प्रज्जवलन कर विधिवत शुभारम्भ किया। काव्य-गोष्ठी में विश्वविद्यालय के अनेक विद्यार्थियों ने काव्य-पाठ कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, जिनमे हिबा, मुमताज, समरा, तेजप्रताप, तान्या, अरीब, मुकर्रम चौधरी, मुसाईतिर आदि छात्र शामिल रहे। कक्षा पाँच की छात्रा संस्कृति उपाध्याय ने स्वरचित मुक्तक सुनाकर तालियाँ बटोरी। उत्कृष्ट काव्य-पाठ करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया गया।

काव्य-गोष्ठी में सुमधुर गीतकार डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने आज जब आंगन सुखों के मेघ छाए, हे पिता हर पल मुझे तुम याद आए” भावपूर्ण गीत सुनाकर सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने हिंदी पर आधारित माहिया भी सुनाए। ओज के कषि डॉ. आरपी सारस्वत ने जग की जितनी भी भाषाएं, हिंदी सबसे न्यारी है। सच बतलाऊं तो फिर सुन लो हिंदी सबसे प्यारी है।’ गीत द्वारा मातृमाषा हिंदी को नमन किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित रहे संभागीय परिवहन अधिकारी शंकरजी सिंह ने अपनी कविताओं से सभी का मन आल्हादित कर दिया। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में साहित्य की समृद्ध परम्परा सभी को प्रेरित करने वाली है। लोक गीतकार नरेंद्र मस्ताना ने अपने लोकगीतों से सभी का मन मोह लिया। विशेषकर हुक्के पर आधारित उनके गीत का सभी ने आनंद लिया। डॉ. राजीव उपाध्याय यायावर ने अपनी काव्य-रचना के माध्यम से सहारनपुर के सांस्कृतिक इतिहास का परिचय दिया। प्रो.(डॉ.) गुंजन अग्रवाल ने सामाजिक जीवन पर आधारित अपनी काव्य-रचना का पाठ किया।

कार्यक्रम में उपस्थित केयर टेकर सूफी जहीर अख्तर ने कहा कि हिंदी देश को एकता के सूत्र में बांधने वाली भाषा है। हिंदी भाषा के साथ अनेक क्षेत्रीय भाषाएं बिना किसी बाधा के प्रगति कर रही है। हमें अपनी राष्ट्रभाषा का सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महीपाल सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। आगतुक कवियों को विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो.(डॉ.) बूटा सिंह सिद्धू ने अपने शुभकामना सन्देश में काव्य गोष्ठियाँ के आयोजकों एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएं प्रेषित की और कहा कि ऐसी काव्य गोष्ठियाँ विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अपनी प्रतिभा और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करती हैं तथा साहित्य के प्रति रुचि को बढ़ावा देती हैं।


इस अवसर पर प्रो.(डॉ.) प्रशांत कुमार, डॉ करुणा अग्रवाल, डॉ. जूही अग्रवाल, डॉ. आदेश कुमार, विकास कुमार, बद्रीश तिवारी आदि शिक्षकगण उपस्थित रहे।
