BRICS सम्मेलन पर कपिल सिब्बल ने की मोदी सरकार की तारीफ, बोले- ‘बिना विवाद संयुक्त बयान बड़ी उपलब्धि’
नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन को लेकर वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार की तारीफ की है। उन्होंने BRICS घोषणापत्र की सराहना करते हुए कहा कि सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच किसी बड़े विवाद का सामने न आना भारत सरकार के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सिब्बल ने कहा कि BRICS में शामिल देशों के आपसी और वैश्विक मुद्दों को देखते हुए सभी देशों को एक साझा बयान पर सहमत कराना आसान नहीं था।
कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि BRICS की बैठक में एक विस्तृत संयुक्त बयान जारी किया गया और कोई ऐसा विवाद सामने नहीं आया, जिससे संगठन के भीतर कड़वाहट पैदा हो। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी स्थिति में था कि यदि सम्मेलन के दौरान कोई बड़ा मतभेद उभरता तो उसका असर BRICS की एकजुटता पर पड़ सकता था। ऐसे में बिना किसी बड़े विवाद के संयुक्त बयान जारी होना सरकार की बड़ी उपलब्धि है।
‘BRICS में सीमा विवाद उठाना आसान नहीं’
कपिल सिब्बल ने कहा कि BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर देशों के द्विपक्षीय सीमा विवादों को उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादों का समाधान संबंधित देशों के बीच ही बातचीत के जरिए होना चाहिए।
उन्होंने BRICS के सदस्य देशों के अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संबंधों और हितों का भी जिक्र किया। सिब्बल ने कहा कि मिस्र के अमेरिका के साथ करीबी संबंध हैं, जबकि ईरान के अमेरिका और इजरायल के साथ गंभीर टकराव चल रहे हैं। ऐसे में BRICS में किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाला प्रस्ताव पारित करना मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के भी अमेरिका के साथ गहरे संबंध हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय और धार्मिक मुद्दे भी मौजूद हैं। ऐसी परिस्थितियों में सभी देशों के बीच ठोस राजनीतिक तालमेल बनाना आसान नहीं है।
‘मिला-जुला समूह, इसलिए साझा प्रस्ताव आसान नहीं’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि BRICS में अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक हितों वाले देशों का समूह है। ऐसे में इस मंच से कोई क्रांतिकारी या बेहद ठोस साझा प्रस्ताव आसानी से सामने आना संभव नहीं है।
सिब्बल ने कहा कि इसी वजह से वह BRICS सम्मेलन में बिना किसी बड़े विवाद के संयुक्त बयान जारी होने को भारत सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धि मानते हैं। उनके मुताबिक, अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत करना अपने आप में बड़ी कामयाबी है।
BRICS की शुरुआत और मनमोहन सिंह का किया जिक्र
कपिल सिब्बल ने BRICS के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इस समूह की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उस समय इसमें ब्राजील, भारत, रूस और चीन शामिल थे। वर्ष 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद BRICS का विस्तार हुआ और बाद में अन्य देशों को भी समूह में शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में BRICS की बैठक के दौरान केंद्र में यूपीए सरकार थी। उस समय न्यू डेवलपमेंट बैंक बनाने का प्रस्ताव सामने आया था। सिब्बल ने इस प्रक्रिया में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि BRICS आज एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में सामने आया है और इसके विस्तार के साथ इसमें शामिल देशों के हित भी काफी विविध हो गए हैं। ऐसे माहौल में भारत की मेजबानी में बिना किसी बड़े मतभेद के संयुक्त घोषणापत्र जारी होना महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।
