जाति जनगणना के फॉर्मेट पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला, ‘ड्रॉप-डाउन’ सूची की मांग
नई दिल्ली: जाति जनगणना के मौजूदा प्रारूप को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जाति जनगणना में पहले से तय ‘ड्रॉप-डाउन’ सूची के बजाय ‘ओपन-एंडेड’ सवाल रखने का फैसला एक गंभीर खामी है। पार्टी का दावा है कि इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम, उपजातियां और वर्तनी दर्ज होने की संभावना बढ़ जाएगी और पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जाति जनगणना का उद्देश्य केवल जातियों की संख्या गिनना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सही सवाल, सटीक आंकड़े और उचित हिस्सेदारी जरूरी है।
क्या है ‘ड्रॉप-डाउन’ और ‘ओपन-एंडेड’ सवाल?
ड्रॉप-डाउन सूची में जवाब देने वाले व्यक्ति को अपनी ओर से कुछ लिखने की जरूरत नहीं होती। उसे पहले से उपलब्ध विकल्पों में से अपनी जाति का नाम चुनना होता है।
वहीं, ओपन-एंडेड सवाल में व्यक्ति को अपनी जाति का नाम खुद लिखना होता है। कांग्रेस का कहना है कि इस व्यवस्था में एक ही जाति के नाम अलग-अलग तरीके से लिखे जाने की संभावना रहती है। इससे आंकड़ों को एकरूप करने और उनका विश्लेषण करने में मुश्किल आ सकती है।
जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि जातिगत जनगणना का मतलब सिर्फ जातियों की गिनती नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की बार-बार मांग के बावजूद केंद्र सरकार ने मौजूदा प्रारूप में ड्रॉप-डाउन सूची की जगह ओपन-एंडेड सवाल रखने का फैसला किया है।
रमेश ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि जनगणना में एक ही जाति के अलग-अलग नाम, उपजातियां और वर्तनी दर्ज हों, जिससे जाति जनगणना की पूरी प्रक्रिया विफल हो जाए।
खरगे और राहुल गांधी ने PM मोदी को लिखा था पत्र
जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त रूप से पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को भेजे गए इस पत्र में जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
कांग्रेस के मुताबिक, पत्र में मौजूदा प्रश्नावली को वापस लेकर प्रमाणित जातियों की सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की गई थी। रमेश ने कहा कि अभी तक प्रधानमंत्री की ओर से इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला है।
तेलंगाना और बिहार के मॉडल का दिया हवाला
कांग्रेस ने जातियों की गणना के लिए तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों का उदाहरण दिया। जयराम रमेश के मुताबिक, पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूची के आधार पर जातियों की गणना करना इस समस्या का व्यावहारिक समाधान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जाति जनगणना के आंकड़े सामाजिक न्याय और विभिन्न वर्गों की हिस्सेदारी से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का आधार बन सकते हैं।
