‘पहले जातिगत भेदभाव खत्म करो, फिर आरक्षण पर करो बात’, रामदास अठावले का बड़ा बयान
नई दिल्ली: आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में जाति के आधार पर भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी। अठावले ने आरक्षण को किसी तरह की खैरात मानने से इनकार करते हुए इसे संवैधानिक अधिकार और वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का माध्यम बताया।
रामदास अठावले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आरक्षण और जातिगत भेदभाव को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में पहुंचने के बावजूद देश के कई हिस्सों में आज भी लोगों के साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता है। ऐसे में आरक्षण को खत्म करने की मांग पर विचार करने से पहले समाज से इस भेदभाव को समाप्त करना जरूरी है।
‘आज भी जाति के नाम पर होता है भेदभाव’
अठावले ने कहा कि गांवों में आज भी कई जगह अलग-अलग बस्तियां देखने को मिलती हैं, जबकि शहरों में भी जाति के आधार पर मकान या फ्लैट देने से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों और सोशल मीडिया जैसे क्षेत्रों में भी जातिगत भेदभाव का प्रभाव दिखाई देता है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, कई मामलों में व्यक्ति की योग्यता और उसके इंसान होने से ज्यादा उसकी जाति को महत्व दिया जाता है। उनका कहना है कि जब तक ऐसी मानसिकता समाज में मौजूद है, तब तक आरक्षण की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आंबेडकर के अपमान पर भी जताई नाराजगी
रामदास अठावले ने सोशल मीडिया पर मीम्स और अन्य माध्यमों से भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के कथित अपमान पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग के बच्चों के साथ जातिगत भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आरक्षण के भविष्य को लेकर स्वस्थ बहस और चर्चा हो सकती है, लेकिन जाति के आधार पर भेदभाव या डॉ. आंबेडकर के अपमान को सामान्य मान लेना उचित नहीं है।
‘आरक्षण कोई खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार है’
अठावले ने कहा कि आरक्षण उन वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का जरिया है, जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव और वंचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण को आर्थिक सहायता या खैरात के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति और वर्ग को अपनी मांग रखने का अधिकार है। अठावले ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आय सीमा बढ़ाने की मांग का समर्थन किए जाने की भी बात कही।
निजी क्षेत्र में आरक्षण की वकालत
केंद्रीय मंत्री ने सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।
अठावले ने आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों से कहा कि पहले देश के गांवों और शहरों में मौजूद जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस दिन जाति और जाति के आधार पर होने वाला भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा, उस दिन आरक्षण की जरूरत भी समाप्त हो सकती है।
‘आरक्षण खत्म करने से पहले भेदभाव खत्म करें’
रामदास अठावले ने कहा कि आरक्षण खत्म करने की चर्चा से पहले समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव पर गंभीरता से काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी वर्ग को लंबे संघर्ष के बाद मिले अधिकार को सीधे खत्म करने की सोच उचित नहीं है। उनके अनुसार, सामाजिक समानता स्थापित होने के बाद ही आरक्षण की आवश्यकता पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है।
