व्रत एवं त्यौहार articles

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पढ़े क्या है कार्तिक पूर्णिमा का महत्‍व

पढ़े क्या है कार्तिक पूर्णिमा का महत्‍व

प्राचीनकाल से ही कार्तिक पूर्णिमा काफी महत्‍व है। शास्‍त्रों में इस दिन गंगा स्‍नान का काफी महत्‍व बताया गया है। इसी दिन पांडवों ने महाभारत के युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए गढ़मुक्तेश्वर में श्राद्ध किया था। इसी दिन गुरु नानक जी का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में मान्‍यता आगे पढ़े…

करवा चौथ: सुहागिन करेंगी अपने चांद का दीदार

करवा  चौथ के दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, आगे पढ़े…

नवरात्र विशेष: नवदुर्गा-पूजा के सांतवे दिन मॉ काल रात्रि की उपासना का विधान है

मॉ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं देवबंद (खिलेन्द्र गांधी): नवरात्र के सातंवे दिन दुर्गा के सातंवे स्वरूप मॉ कालरात्रि की पूजा अर्चना भक्तों द्वारा की जाती है। नवरात्र के सातवें दिन मॉ दुर्गा के सांतवे स्वरूप को कालरात्रि कहा जाता है, दुर्गा-पूजा के सांतवे दिन मॉ काल रात्रि की आगे पढ़े…

नवरात्र का पहला दिन: ऐसे करें देवी शैलपुत्री की पूजा

गुरूवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। ऐसे में पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के नवस्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा के नौ रूपो में सबसे पहला रूप शैलपुत्री का हैं। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने आगे पढ़े…

सूर्य उपासना से मिलती है कई रोगों से मुक्ति

भारत के सनातन धर्म में पांच देवों की आराधना का महत्व है। आदित्य (सूर्य), गणनाथ (गणेशजी), देवी (दुर्गा), रुद्र (शिव) और केशव (विष्णु)। इन पांचों देवों की पूजा सब कार्य में की जाती है। इनमें सूर्य ही ऐसे देव हैं जिनका दर्शन प्रत्यक्ष होता रहा है। सूर्य के बिना हमारा जीवन नहीं चल सकता। सूर्य आगे पढ़े…

हर प्रकार की खुशियों के लिए हनुमान जयंती से शुरू करें शुभ मंत्र

जीवन में शक्ति और सिद्धि की कामना को पूरी करने के लिए श्रीहनुमान उपासना अचूक मानी जाती है। श्रीहनुमान व उनका चरित्र जीवन में संकल्प, बल, ऊर्जा, बुद्धि, चरित्र शुद्धि, समर्पण, शौर्य, पराक्रम, दृढ़ता के साथ जीवन में हर चुनौतियों या कठिनाइयों का सामना करने व उनसे पार पाने की अद्भुत प्रेरणा है। श्री हनुमान आगे पढ़े…

चैत्र नवरात्रि के चार अचूक चमत्कारी मंत्र और उनका फल

हर कोई चाहता है कि नवरात्रि में देवी की पूजा पूरी श्रद्धा-भक्ति से हो ताकि परिवार में सुख-शांति बनी रहे। लेकिन समयाभाव के कारण पूजा उतनी विधि विधान से नहीं हो पाती जितनी कि अपेक्षित है। प्रस्तुत है 4 ऐसे दिव्य मंत्र जिनमें से किसी एक का भी जप 9 दिनों में कर लिया जाए आगे पढ़े…

Navratri

भर्मित न हो आज ही शुरू हो रहे है नवरात्र, क्यों – पढ़े पूरा विश्लेषण

ब्रह्मपुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी। इसके अतिरिक्त सतयुग का आरंभ भी इसी दिन हुआ था। इसी महत्व को समझ कर भारत के महामहिम सम्राट विक्रमादित्य ने भी अपने संवत्सर का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा को किया था। निर्णयसिन्धु आदि शास्त्रों आगे पढ़े…

Maa Durga

नवरात्रि में ऐसे करें मंत्र सिद्धि, हर समस्या का होगा समाधान

चैत्र नवरात्रि(Chetra Navratri) में मां की आराधना अत्यंत फलदायक रहती है। चैत्री देवी(Chetri Devi) साधना में हम मां की पूजन, सप्तशती पाठ(Saptsati Path) एवं उनके रूपों की भक्ति तो करते ही हैं, इसी के साथ नाना प्रकार के मंत्र की सिद्धि भी हम कर उसका हमारे जीवन में व परोपकार के लिए लाभ ले सकते आगे पढ़े…

Navratri

नवरात्रों पर मां भगवती की आराधना से होता है कल्याण

मंगलवार की प्रातः 8 बजकर 24 मिनट पर करें कलश स्थापना चैत्र नवरात्र (Chetra Navratra) के अवसर पर देवबंद के श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि नवरात्रों में मां भगवती की सच्चे मन से पूजा करने से शुभ फल मिलता है। इन नवरात्रों का आगे पढ़े…

महालक्ष्मी व्रत जानिए कैसे करें…

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी : लक्ष्मी का व्रत श्री महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी के दिन से किया जाता है। यह व्रत सोलह दिनों तक चलता है। इस व्रत धन की देवी मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। महालक्ष्मी व्रत के दिन क्या करें :- * प्रात:काल में स्नानादि कार्यों से निवृत आगे पढ़े…

अलौकिक गुणों के देवता है भगवान श्री गणेश

गीतों में तो गणेश की पारस की मूर्ति बनाने की कल्पना है, जिसे छू कर हमारा विकारी जीवन स्वर्ण बन जाए। दरअसल, गणेश हमारे सोच, चिंतन, धारणा और व्यवहार में इसलिए पूजनीय हैं क्योंकि वे गुणों की खान हैं। उनमें समस्त गुण और शक्तियां शोभायमान हैं। श्री गणेश अर्थात्‌ श्री गुणेश। वे श्री अर्थात्‌ श्रेष्ठ आगे पढ़े…

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