संतो की संगति के बिना मानव जीवन का उद्धार संभव नही : आचार्य दंडी स्वामी ब्रहमानंद महाराज

नकुड [इंद्रेश]। बिना संतो के मिले मानव का उद्धार नही होता। साधू वही है जो क्षमा करता है। अनुकूल व प्रतिकूल परिस्थितियो मे शांत रहता है। मानव के उद्धार के लिये काम करता है।

ग्राम रणदेवी मे रामदूत कालेज में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा के आचार्य दंडी स्वामि ब्रहमानंद सरस्वती जी महाराज पृथ्वी के उद्धार व सृष्टि के सृजन की चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संसार मे बूरा कुछ भी नंही होता। भगवान राम यदि वन को न जाते तो व जन जन के हृदय के राम न बन पाते। सृजन के लिये विसजृन आवश्यक है। देवहुति को मोक्ष का मार्ग बताते हुए कपिल मूनि ने उन्हे साधू की सगंति करने के लिये कहा था। क्योंकि साधू की संगत से ही भगवद चर्चा होती है। भगवद चर्चा से ही प्रभु तक जाने का मार्ग मिलता है।

उन्होंने कहा ब्रहमा ने सृष्टि की रजचा की। उन्होंने सनकादि मूनियो के नारायण तक जाने व भगवान के दो पार्षदो को सनकादि के देत्य होने के श्राप व पृथ्वी के रसातल मे हरण व भगवान वाराह द्धारा उसे मुक्त कराने की चर्चा की। कहा कि देव हमेशा क्षमा करते है। ओर दैत्य दूसरो से जलते है। क्षमा करने वाला चैन की नींद सोता है। जबकि क्षमा ने करने वाला हमेशा आपसी जलन का शिकार होकर स्वंय ही जलता रहता है। क्षमा व संतुलन जीवन जीने के महत्वपूर्ण सिद्धांत है। अपने प्रति किये जाने वाले अपराध को क्षमा करके भूल जाना सबसे बडा गुण होता है। भागवद कथा मे बडी संख्या मे श्रद्धालु श्रोता उपस्थित रहे। कथा के आरंभ मे ब्लाक प्रमुख सुभाष चौधरी व अन्य अतिथियो ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना कर आरती मे भाग लिया।

यहां चल रहे 100 कुंडीय श्री सूर्य पंचायतन महायज्ञ तीसरे दिन भी जारी रहा। शाम तक यज्ञशाला मे सौ कुंडी यज्ञ चलता रहा। बडी संख्या मे श्रद्धालुओ ने यज्ञशाला की परिक्रमा की। सुबह से ही यज्ञशाला मे श्रद्धालुओ का तांता लगा रहा।


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